नई दिल्ली: देशभर में NEET UG 2026 पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र और विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच, इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “परीक्षा प्रणाली में गलतियों का सिलसिला अब खत्म होना चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह केवल इस मामले की सुनवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वर्ष परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया पर नजर रखेगा।
याचिकाओं में क्या मांग की गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों को देखते हुए NTA की जगह एक नई, तकनीकी रूप से मजबूत, सुरक्षित और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाई जाए। इसके अलावा, अदालत से यह भी मांग की गई है कि CBI को निर्देश दिया जाए कि वह पेपर लीक जांच की प्रगति रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करे।
‘पूरे साल करेंगे निगरानी’— सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए अदालत पूरे साल इस मामले की निगरानी करेगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए उठाए जाने वाले सभी कदमों की जानकारी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत सुधार लागू हों।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षार्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत विवरण देगी। साथ ही राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार केवल उन्हीं तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उससे आगे बढ़कर भी सुधार करेगी। सरकार ने यह भी कहा कि परीक्षा व्यवस्था की निगरानी सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है ताकि छात्रों के हितों की पूरी सुरक्षा हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने किन मुद्दों पर मांगा जवाब?
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मांगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- परीक्षा में होने वाली गलतियों को पूरी तरह कैसे रोका जाएगा?
- कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) को लेकर सरकार की क्या योजना है?
- प्रश्नपत्र सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंचाए जाएंगे?
- साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए क्या व्यवस्था होगी?
- भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए स्थायी संस्थागत ढांचा कैसे तैयार किया जाएगा?
अदालत ने इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की है।
सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद खत्म किया अनशन
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। बताया गया कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति जताई है। सरकार ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के प्रति उसका रुख सकारात्मक है। संसद में पेपर लीक से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है। साथ ही, पेपर लीक की घटनाओं के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।


