33.9 C
Agra
Homeदेश1984 सिख-विरोधी दंगा मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन,...

1984 सिख-विरोधी दंगा मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, 80 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली: 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामलों में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सज्जन कुमार तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में सामने आया था। इन मामलों में लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालतों ने उन्हें अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया।

दिल्ली कैंट के पालम कॉलोनी हत्याकांड में हुई थी उम्रकैद

सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट के पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाए जाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की गवाह चाम कौर ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान सज्जन कुमार भीड़ को भड़का रहे थे। मामले में अदालत के फैसले के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।

सुल्तानपुरी दंगा मामले में मिली थी राहत

1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में सितंबर 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को सुल्तानपुरी में तीन सिखों की हत्या के मामले में बरी कर दिया था। हालांकि, दिल्ली कैंट से जुड़े मामले में मिली उम्रकैद की सजा के कारण उनकी जेल की सजा जारी रही।

1984 में सरस्वती विहार में पिता-पुत्र की हत्या

दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी। आरोपों के मुताबिक, भीड़ ने दोनों पर लोहे की सरियों और लाठियों से हमला किया और बाद में उन्हें जिंदा जला दिया। इस मामले में अदालत ने 12 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था, जबकि 25 फरवरी 2025 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

दशकों तक चला 1984 दंगा मामलों का कानूनी सफर

सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की कानूनी लड़ाई कई दशकों तक चली। उनके खिलाफ मामलों में गवाहों के बयान, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और घटनाओं से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर अदालतों में सुनवाई हुई। सज्जन कुमार की मौत के साथ 1984 के दंगा मामलों से जुड़े उनके खिलाफ चल रहे कानूनी अध्याय का अंत हो गया। हालांकि, 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर न्याय और जवाबदेही का मुद्दा भारतीय राजनीति और न्यायिक इतिहास में लंबे समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments