Supreme Court की मंजूरी के बाद आगरा-एटा NH-321G परियोजना को मिली नई रफ्तार
आगरा के टेढ़ी बगिया से एटा जिले के नूंहखास तक प्रस्तावित 51.60 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-321G) के निर्माण की राह आखिरकार साफ हो गई है। 685.51 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) क्षेत्र में आवश्यक पेड़ों की कटाई की अनुमति दे दी है। लंबे समय से वन स्वीकृति और न्यायालय में लंबित मामले के कारण अटकी परियोजना अब अगले चरण में प्रवेश करेगी।
पेड़ कटान की अनुमति नहीं मिलने से अटका था काम
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार, परियोजना की सबसे बड़ी बाधा TTZ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति थी। वन विभाग की अंतिम मंजूरी (Stage-2 Clearance) सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निर्भर थी। मंगलवार को कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब वन विभाग में स्टेज-2 क्लीयरेंस की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई
इस परियोजना के लिए पहले 19 मार्च 2024 को वित्तीय निविदा खोली गई थी, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 7 अगस्त 2025 को उसे निरस्त कर दिया। इसके बाद 26 फरवरी 2026 को नए सिरे से टेंडर जारी किए गए।
परियोजना की तकनीकी निविदा 16 जुलाई 2026 को खोली जा चुकी है। हालांकि, न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका और अब तक परियोजना की भौतिक प्रगति शून्य बनी हुई है।
भोपाल की कंपनी ने तैयार की DPR
इस हाईवे परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल ने तैयार की है। परियोजना को गति दिलाने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल भी लगातार संबंधित विभागों और केंद्र सरकार के साथ समन्वय करते रहे।
भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा
निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
- आगरा के 7 गांवों में भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और किसानों को 22.36 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है।
- एटा के 13 गांवों में 20.24 करोड़ रुपये के कुल अवार्ड में से 16.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
- शेष 3.39 करोड़ रुपये भूमि राशि पोर्टल के माध्यम से जल्द जारी किए जाएंगे।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा लाभ
NH-321G के निर्माण से आगरा और एटा के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, कृषि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह परियोजना अब वन विभाग की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद धरातल पर उतरने की ओर बढ़ रही है।


