लखीमपुर खीरी। नेपाल स्थित बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद शारदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। पलियाकलां क्षेत्र में नदी खतरे के निशान को पार कर गई है, जिससे कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। सड़कें जलमग्न होने से दर्जनभर से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।
खतरे के निशान से ऊपर पहुंची शारदा नदी
मंगलवार शाम करीब चार बजे शारदा नदी का जलस्तर 154.690 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 154.590 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से पलियाकलां क्षेत्र के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। मेलाघाट स्थित कब्रिस्तान और कर्बला के पास खैराना मार्ग के रपटा पुल पर तेज बहाव देखा गया।
एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूटा
मझौरा-इमलिया मुख्य मार्ग पर पानी भरने से यातायात पूरी तरह बंद हो गया है। इसके चलते इमलिया फॉर्म, जंगल नंबर-7, छंगा टांडा, जमुनहा, सूरजपुर, देशराज टांडा, ढकिया, बझेड़ा, कुंवरपुर, रेती पुरवा, सापुतारा और आसपास के कई गांवों का संपर्क पलिया से कट गया है। ग्रामीणों को अब भीरा होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
रेलवे लाइन तक पहुंचा बाढ़ का पानी, फसलें जलमग्न
बोझवा ग्राम पंचायत के मटहिया गांव में बाढ़ का पानी रेलवे लाइन के किनारे तक पहुंच गया है। वहीं बरुआ कला, छोटा बरुआ और दौलतापुर में धान सहित अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
गांवों में बढ़ा मगरमच्छों का खतरा
दौलतापुर और आसपास के गांवों में बाढ़ के साथ मगरमच्छ भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार अब तक तीन-चार कुत्ते मगरमच्छों का शिकार बन चुके हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही मगरमच्छों को पकड़ने का अभियान भी शुरू किया गया।
डीएम ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की
निघासन क्षेत्र में जिलाधिकारी अंजनी कुमार ने कटान और बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को राहत और पुनर्वास कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने भी राहत सामग्री वितरण की समीक्षा की। प्रशासन ने बुधवार से प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न किट उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
पुनर्वास की मांग तेज
ग्रंट नंबर-12 के करीब 200 परिवारों के 500 लोगों ने स्थायी पुनर्वास की मांग पूरी न होने पर 19 जुलाई को मतदान बहिष्कार का एलान किया था। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा कर राहत और पुनर्वास की तैयारियों का जायजा लिया।
बझेड़ा तटबंध पर शुरू हुआ बचाव कार्य
बिजुआ क्षेत्र के बझेड़ा तटबंध पर कटान शुरू होने के बाद बाढ़ खंड की टीम ने मौके पर पहुंचकर मिट्टी से भरे बोरे डालकर मरम्मत कार्य कराया। विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और तटबंध की लगातार निगरानी की जा रही है। संभावित बाढ़ से निपटने के लिए राजस्व, सिंचाई, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें गांवों में तैनात हैं। चार बाढ़ राहत केंद्र और तीन बाढ़ चौकियां भी सक्रिय कर दी गई हैं।
घाघरा नदी में समाई कटानरोधी परियोजना का हिस्सा
धौरहरा क्षेत्र के भदईपुरवा गांव के पास करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से चार वर्ष पहले बनाई गई कटानरोधी परियोजना का लगभग 30 मीटर हिस्सा घाघरा नदी में बह गया है। इससे गांव और आसपास की कृषि भूमि पर कटान का खतरा बढ़ गया है। सिंचाई विभाग अब वायर क्रेट और ईंटों के रोड़ों की मदद से नदी किनारे सुरक्षा कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
प्रशासन अलर्ट मोड में
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।


