मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की बिगड़ती स्वच्छता व्यवस्था और बढ़ते प्लास्टिक कचरे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और खुले इलाकों में कचरा या प्लास्टिक फेंकने वालों के खिलाफ जरूरत पड़ने पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएं, ताकि इस प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने कहा कि नागरिकों की लापरवाही न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पर भी अतिरिक्त बोझ डाल रही है। अदालत के अनुसार, इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका कानूनों का सख्ती से पालन और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करना है।
कांजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी कांजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से उठने वाली दुर्गंध और गैस उत्सर्जन से संबंधित विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आई। अदालत ने कहा कि शहर की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
समुद्र और नालों में पहुंच रहा प्लास्टिक, जताई गंभीर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मानसून में समुद्र में फेंका गया प्लास्टिक और कचरा वापस तट पर आ जाता है, जबकि बड़ी मात्रा में कचरा समुद्र की गहराई में जमा होकर समुद्री जीवों और पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाता है। खंडपीठ ने यह भी पाया कि मुंबई के घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले बड़े नालों में नियमित रूप से ठोस कचरा और प्लास्टिक डाला जा रहा है, जो अंततः समुद्र में पहुंच जाता है।
नालों को ‘मिनी डंपिंग साइट’ बनने से रोकने के निर्देश
हाईकोर्ट ने BMC के सभी वार्ड अधिकारियों को निर्देश दिया कि नगर निगम के नालों को ढकने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे “मिनी डंपिंग साइट” में न बदलें। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
नागरिकों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि नागरिक सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति अनुशासित व्यवहार अपनाएं। सामाजिक और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए नागरिक मूल्यों का पालन प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई विदेशी देशों में लोग सख्त कानूनों के कारण सार्वजनिक नियमों का पालन करते हैं, जबकि भारत में अक्सर लापरवाही देखने को मिलती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि BMC और उसके वार्ड अधिकारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते, विशेष रूप से उन झुग्गी बस्तियों में जहां अभी तक पुनर्विकास नहीं हुआ है।
वार्ड स्तर पर बनेगी स्वच्छता कार्ययोजना
अदालत ने कहा कि केवल शहर के चुनिंदा इलाकों को साफ रखना पर्याप्त नहीं है। मुंबई के हर वार्ड, उपनगर, सड़क और फुटपाथ को स्वच्छ रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है। इसी के तहत हाईकोर्ट ने BMC को निर्देश दिया कि वार्ड स्तर पर व्यापक स्वच्छता कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही नागरिकों की शिकायतें दर्ज करने और उनके त्वरित समाधान के लिए वार्ड-वार मोबाइल शिकायत ऐप शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि जागरूक नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ही मुंबई में स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बेहतर मानक स्थापित किए जा सकते हैं।


