जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों में प्रशासक काल के दौरान हुए वित्तीय लेनदेन और भुगतानों में कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने 26 मई से 29 जून 2026 के बीच केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की मद से सबसे अधिक भुगतान करने वाली ग्राम पंचायतों के कार्यों की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है। डीएम के निर्देश पर जांच के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों और संबंधित खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) की संयुक्त टीम गठित की जाएगी। यह टीम उन ग्राम पंचायतों की जांच करेगी, जहां प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक के रूप में कार्यरत पूर्व प्रधानों द्वारा बड़े पैमाने पर भुगतान किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रधानों को उनके कार्यकाल में स्वीकृत, निर्माणाधीन अथवा पूर्ण हो चुके विकास कार्यों के भुगतान की अनुमति पूर्व व्यवस्था के अनुसार दी गई थी। हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ उठाकर कई स्थानों पर अनियमित भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। इन शिकायतों के शासन स्तर तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। जांच के दौरान संयुक्त टीम कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि संबंधित कार्यों को विधिवत प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति प्राप्त थी या नहीं, वित्तीय मानकों का पालन किया गया या नहीं, तथा अभिलेखों में दर्ज विकास कार्य वास्तव में धरातल पर किए गए हैं या नहीं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्राम पंचायतों में निर्धारित अवधि के दौरान सबसे अधिक राशि निकाली गई है, वहां किए गए सभी विकास कार्यों की गहन जांच की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से उन ग्राम पंचायतों में हड़कंप मच गया है, जहां प्रशासक काल के दौरान बड़ी संख्या में भुगतान स्वीकृत कराए गए हैं।


