प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का बिजली भार (लोड) स्वतः बढ़ाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली कंपनियां तीन माह की अधिकतम खपत के आधार पर बिना पूर्व सूचना दिए कनेक्शन का लोड बढ़ा रही हैं, जबकि लोड कम कराने के लिए उपभोक्ताओं को आवेदन देने से लेकर उपकेंद्रों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रदेश में करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। नियम के अनुसार, किसी उपभोक्ता की लगातार तीन माह की अधिकतम बिजली खपत के आधार पर उसका लोड बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकांश मामलों में उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी जाती और इसकी जानकारी तभी मिलती है, जब बढ़े हुए फिक्स चार्ज के साथ बिजली बिल जारी होता है।
47 लाख उपभोक्ताओं का लोड बढ़ने से बढ़ा विवाद
हाल ही में लगभग 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया। इनमें करीब आधे स्मार्ट मीटर और आधे सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद कई उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि लोड स्वतः बढ़ाया जा सकता है तो बिजली की खपत कम होने पर उसे स्वतः घटाने की व्यवस्था क्यों नहीं है।
लोड बढ़ने से कैसे बढ़ता है बिल?
यदि किसी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड 2 किलोवाट है और उसने लगातार तीन महीनों में 2.7, 2.8 और 2.9 किलोवाट तक बिजली की अधिकतम खपत की, तो उसका लोड बढ़ाकर लगभग 2.7 किलोवाट मान लिया जाता है। इसके बाद फिक्स चार्ज अगले स्लैब यानी 3 किलोवाट के अनुसार वसूला जाता है। इसका सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है। फिक्स चार्ज बढ़ने के साथ अधिकतम मांग जुर्माना (एमडी पेनाल्टी) और सिक्योरिटी राशि भी बढ़ जाती है। वहीं, बाद में लोड कम कराने पर उपभोक्ताओं को पूरी राहत नहीं मिलती और फिक्स चार्ज में केवल आंशिक कमी की जाती है।
लोड कम कराने के लिए करनी पड़ती है प्रक्रिया
उपभोक्ताओं का कहना है कि सर्दियों में बिजली की खपत कम होने के बावजूद विभाग स्वतः लोड कम नहीं करता। इसके लिए अलग से आवेदन देना पड़ता है, खपत के प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं और कई बार उपकेंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि संबंधित अधिकारी या मीटर रीडर की संस्तुति नहीं मिलती, तो लोड कम होने में देरी हो जाती है।
विभाग ने बताया क्यों बढ़ाया जाता है लोड
पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा के अनुसार, किसी क्षेत्र में यदि स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली की मांग होने लगे तो ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे उसके खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए वास्तविक खपत के अनुसार लोड बढ़ाकर बिजली व्यवस्था के लिए आवश्यक संसाधनों की योजना बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता लोड कम कराने के लिए आवेदन देता है और जांच में उसकी मांग सही पाई जाती है तो लोड कम किया जाता है। साथ ही अतिरिक्त जमा की गई सिक्योरिटी राशि पर ब्याज देने का भी प्रावधान है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के अलावा अन्य उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने से पहले सूचना देना अनिवार्य है। उनका आरोप है कि कई मामलों में इस नियम का पालन नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि बिजली कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करें ताकि जिस तरह लोड स्वतः बढ़ाया जाता है, उसी तरह बिजली की खपत कम होने पर लोड भी स्वतः कम हो सके। इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनेगी।


