जमीन की खरीद-फरोख्त से पहले दस्तावेजों का सत्यापन कराने वाले खरीदारों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। निबंधन विभाग ने वसीयत (Will) और पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) की प्रमाणित प्रतियां जारी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब कोई भी थर्ड पार्टी इन दस्तावेजों की नकल आसानी से प्राप्त नहीं कर सकेगी।
अब क्या होंगे नए नियम?
निबंधन विभाग के नए आदेश के तहत वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ संबंधित मूल पक्षकार का पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) और एक पासपोर्ट साइज फोटो लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इन दस्तावेजों के बिना आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के लिए आने वाले लोगों को कई दिनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जानकारी के अभाव और जरूरी दस्तावेज पूरे न होने के कारण अब तक 15 से अधिक आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं।
शासन ने क्यों लिया यह फैसला?
उपायुक्त स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन योगेश कुमार के अनुसार, वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रमाणित प्रतियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए शासन ने यह सख्त कदम उठाया है। उनका कहना है कि संवेदनशील दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल रोकना विभाग की प्राथमिकता है, इसलिए पहचान पत्र और फोटो को अनिवार्य बनाया गया है।
संपत्ति खरीदारों की बढ़ी चिंता
सदर तहसील बार एसोसिएशन के महासचिव अरविंद दुबे का कहना है कि इस नियम से व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में संपत्ति के मूल मालिकों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है और वही संपत्ति कई बार खरीदी-बेची जा चुकी होती है। ऐसी स्थिति में नए खरीदार संपत्ति के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रतियां मांगते हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद पुराने दस्तावेज हासिल करना काफी कठिन हो गया है।
पारदर्शी सत्यापन पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है, लेकिन इससे वास्तविक खरीदारों और संपत्ति के सत्यापन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। खासकर पुराने मामलों में, जहां मूल पक्षकार उपलब्ध नहीं हैं, वहां दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना बड़ी चुनौती बन सकता है।


