लखनऊ, 6 जुलाई। भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पार्क रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, विचारों और देश की एकता एवं अखंडता के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज यदि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा है, तो इसके पीछे जिन महान नेताओं का योगदान रहा है, उनमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देशहित को सर्वोपरि रखते हुए महत्वपूर्ण आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और राष्ट्र की एकता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।सीएम योगी ने आगे कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खाद्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में देश की खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने देश की आर्थिक और औद्योगिक नीतियों को मजबूत आधार प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तत्कालीन नीतियां देश की अखंडता के लिए चुनौती बनती नजर आईं, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्ता का मोह त्यागकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देते हुए जम्मू-कश्मीर की परमिट व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जम्मू-कश्मीर में ही उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री ने उनके बलिदान को देश की एकता और अखंडता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।


