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सिपाही सुधीर सिंह की मौत से गांव में मातम, गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार से परिजनों का इनकार

आगरा/बुलंदशहर। बुलंदशहर के औरंगाबाद थाना क्षेत्र की लखावटी पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही सुधीर सिंह का शव गुरुवार देर रात उनके पैतृक गांव सिंगेचा (आगरा) पहुंचा तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शव घर पहुंचते ही परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि माता-पिता बेसुध हो गए। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार मौके पर पहुंच गए।

गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार नहीं करने का ऐलान

मृतक के परिजनों ने साफ कहा कि जब तक इस मामले में नामजद आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक सुधीर सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों के कथित उत्पीड़न से परेशान होकर सुधीर ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। उनका दावा है कि सुधीर ने अपनी मौत से पहले एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी छोड़ी है, जिसमें उसने अपनी पीड़ा जाहिर की थी। पिता जगवीर सिंह ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने बेटे को वर्दी पहनाकर ड्यूटी पर भेजा था, लेकिन वह कफन में लौटकर आया। जो भी उसकी मौत का जिम्मेदार है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हमें न्याय चाहिए।”

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा

परिजनों के अंतिम संस्कार से इनकार करने की सूचना मिलते ही एसीपी शमसाबाद राजीव रंजन श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने परिवार को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन परिजन लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार के लिए तैयार होने की बात पर अड़े रहे। इस दौरान भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा और पूर्व विधायक डॉ. राजेंद्र सिंह भी गांव पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

पूरे गांव में पसरा मातम

सुधीर सिंह की मौत की खबर मिलते ही गांव सिंगेचा में शोक का माहौल बन गया। ग्रामीणों के अनुसार, घटना के बाद कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गांव वालों ने बताया कि सुधीर बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के थे। जब भी छुट्टी लेकर गांव आते, सभी लोगों से मिलते और उनका हालचाल जरूर पूछते थे।

परिवार का इकलौता सरकारी नौकरी करने वाला सदस्य था सुधीर

रिश्तेदार रणवीर सिंह ने बताया कि सुधीर के पिता जगवीर सिंह ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं है। मां गुड्डी देवी लंबे समय से बीमार रहती हैं। परिवार में बड़ा भाई कृष्णा और छोटा भाई पवन हैं। सुधीर परिवार का इकलौता सदस्य था, जिसकी सरकारी नौकरी लगी थी और पूरे परिवार की उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। वह अपने छोटे भाई पवन को भी पुलिस भर्ती की तैयारी करा रहा था ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।

मां की चीखें सुन भावुक हुए ग्रामीण

जब सुधीर का शव घर पहुंचा तो मां गुड्डी देवी बेटे को देखकर बार-बार बेहोश हो गईं। होश में आते ही वह “बेटा… बेटा…” कहकर विलाप करने लगतीं। पिता जगवीर सिंह भी अपने आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने रोते हुए कहा, “बुढ़ापे का सहारा छिन गया। मेरे बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था?” परिवार के दर्द और गांव के माहौल को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। फिलहाल परिजन न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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