शामली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली हैं। उन्होंने दावा किया कि जो शामली कभी अपराध, पलायन और भय के कारण सुर्खियों में रहता था, वह आज विकास, बेहतर कानून-व्यवस्था और आधुनिक कनेक्टिविटी का केंद्र बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब दस वर्ष पहले शामली का नाम आते ही लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती थी। उनके अनुसार उस समय जिले में खुलेआम गुंडागर्दी होती थी, बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हो रहा था, विकास कार्य ठप पड़े थे और युवाओं के सामने रोजगार के सीमित अवसर थे। उन्होंने यह भी कहा कि किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, जबकि महिलाएं और बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती थीं।
तीन एक्सप्रेसवे का संगम बना शामली
योगी आदित्यनाथ ने जिले की बदलती तस्वीर का उदाहरण देते हुए कहा कि शामली अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान बन गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, शामली-अंबाला एक्सप्रेसवे और शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का संगम इस जिले में हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से जोड़ते हुए कहा कि यह कनेक्टिविटी भविष्य में क्षेत्र के विकास और निवेश को नई गति देगी।
चीनी उद्योग और किसानों पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों के कार्यकाल में 29 चीनी मिलें बंद हुई थीं। वहीं, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज चीनी, गन्ना और इथेनॉल उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है, जिससे किसानों की आय और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
कानून-व्यवस्था और धार्मिक मुद्दों पर विपक्ष पर निशाना
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी पिछली सरकारों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले कैराना क्षेत्र में अपराध और हत्याएं आम बात थीं तथा महिलाएं और बेटियां घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस करती थीं।
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर धार्मिक आयोजनों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान कांवड़ यात्रा, कृष्ण जन्माष्टमी और राम नवमी जैसे धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध या बाधाएं लगाई जाती थीं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों की संपत्तियों पर कब्जे किए जाते थे।


