मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार संगठन Association of Malayalam Movie Artists (AMMA) में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट सामने आया है। संगठन की पहली महिला प्रेसिडेंट बनीं Shweta Menon का कार्यकाल रविवार, 21 जून को अचानक समाप्त हो गया, जब पूरी एग्जीक्यूटिव कमेटी ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद श्वेता मेनन ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए अपने फैसले के पीछे की वजह बताई। उन्होंने साफ कहा कि उनका इस्तीफा किसी दबाव या कमजोरी का परिणाम नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए उठाया गया कदम था।
‘कठपुतली बनने से इनकार किया, इसलिए छोड़ा पद’
श्वेता मेनन ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने किसी के इशारों पर काम करने से इनकार किया, जिसके बाद उनके खिलाफ लगातार गलत सूचनाएं और आरोपों का माहौल बनाया गया। उनका दावा है कि चुनाव से पहले कुछ लोगों को उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए आगे किया गया था, लेकिन इसके बावजूद AMMA के अधिकांश सदस्यों ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें जीत दिलाई। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी ईमानदारी और क्षमता के साथ काम करने की कोशिश की।
पिछले कार्यकालों की जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
अपने बयान में श्वेता ने संगठन के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व नहीं चाहते थे कि पिछली कमेटियों के कार्यों की निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने मांग की कि न सिर्फ मौजूदा कार्यकाल, बल्कि पिछले दो कार्यकालों के सभी वित्तीय रिकॉर्ड और निर्णयों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए। श्वेता के अनुसार, संगठन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट जरूरी है।
राजनीतिक अटकलों पर भी दिया जवाब
इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इन अटकलों को खारिज करते हुए श्वेता ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी राजनीतिक दल के साथ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका रुख पूरी तरह स्वतंत्र है और उनका फैसला किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं था। उन्होंने अपने संदेश का अंत एक फिल्मी अंदाज में करते हुए लिखा, “यह फैसला कमजोरी की वजह से नहीं, आत्म-सम्मान की वजह से था। पिक्चर अभी बाकी है, मेरे दोस्त।”
AMMA में महिलाओं के नेतृत्व का ऐतिहासिक अध्याय
साल 2025 में AMMA ने इतिहास रचा था, जब पहली बार संगठन के दो शीर्ष पद महिलाओं को मिले। श्वेता मेनन को प्रेसिडेंट और Kuku Parameswaran को जनरल सेक्रेटरी चुना गया था। इसे संगठन में बदलाव और महिला नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। हालांकि, यह ऐतिहासिक उपलब्धि ज्यादा समय तक सुर्खियों में नहीं रह सकी। आंतरिक मतभेद, प्रशासनिक विवाद और जवाबदेही को लेकर उठे सवालों ने संगठन के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया, जिसका परिणाम पूरी एग्जीक्यूटिव कमेटी के सामूहिक इस्तीफे के रूप में सामने आया।


