श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। पांच दिनों तक चले आतंकवाद विरोधी अभियान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के टॉप कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया। पुलिस के अनुसार, अभियान अभी भी जारी है क्योंकि इलाके में एक अन्य आतंकी के छिपे होने की आशंका है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “आप भाग सकते हैं, लेकिन छिप नहीं सकते। एसओजी शोपियां ने सेना और सीआरपीएफ के साथ संयुक्त अभियान में लश्कर के एक आतंकी को मार गिराया है।”
जाकिर अहमद गनी की हुई पहचान
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मारे गए आतंकी की पहचान 26 वर्षीय जाकिर अहमद गनी के रूप में की है। वह कुलगाम जिले के मोतलहामा क्षेत्र का निवासी था। अधिकारियों के मुताबिक, 27 सितंबर 2023 को वह शटरिंग का काम करने के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। इसके बाद परिवार ने काफी तलाश की और 3 अक्टूबर 2023 को कुलगाम पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि गनी बाद में लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में शामिल हो गया था। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला भी दर्ज था।
कैसे चला पांच दिन का ऑपरेशन?
सुरक्षा एजेंसियों ने 3 जुलाई को शोपियां के मीमंदर क्षेत्र में स्थित घने बागानों में तलाशी अभियान शुरू किया था। निगरानी कैमरों की मदद से दो संदिग्ध आतंकियों की मौजूदगी का पता चला, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना की 55 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), 44 आरआर और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर दी। अभियान के दौरान आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच कई बार रुक-रुक कर गोलीबारी हुई। घने पेड़ों और बागानों के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा। सेना की विक्टर फोर्स ने सभी संभावित भागने के रास्तों को सील करने के लिए अतिरिक्त जवान और आधुनिक निगरानी उपकरण तैनात किए।
दूसरे आतंकी की तलाश जारी
अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान दो आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। जाकिर अहमद गनी के मारे जाने के बाद अब दूसरे आतंकी, जिसकी पहचान लतीफ के रूप में होने की आशंका है, की तलाश जारी है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके के निकासी मार्ग बंद कर दिए हैं और ड्रोन, निगरानी कैमरों तथा अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, अभियान जारी रहेगा।


