मराठी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री और मशहूर लावणी कलाकार मधु कांबीकर का 73 साल की उम्र में निधन हो गया है। सोमवार, 12 अक्टूबर को पुणे में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार थीं। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद मराठी फिल्म इंडस्ट्री और लोक कला जगत में शोक की लहर है। महाराष्ट्र के कई नेताओं और उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
मधु कांबीकर के निधन से मराठी कला जगत को बड़ा झटका
मधु कांबीकर मराठी सिनेमा की उन कलाकारों में शामिल थीं, जिन्होंने अपने अभिनय और लावणी नृत्य से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। फिल्मों के साथ-साथ लोक नाटकों और रंगमंच पर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनकी कला ने मराठी लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहीं मधु कांबीकर के निधन की खबर से उनके चाहने वाले दुखी हैं। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं और मराठी सिनेमा में उनके योगदान को याद कर रहे हैं।
चंद्रकांत पाटिल ने जताया दुख
महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने मधु कांबीकर के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री ने मराठी लोक कला, लावणी, रंगमंच और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई थी। चंद्रकांत पाटिल के मुताबिक, मधु कांबीकर ने अपनी कला और अभिनय के जरिए दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। मराठी लोक कला की विरासत को समृद्ध करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन से महाराष्ट्र के कला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
नाना पाटेकर के साथ भी किया था काम
मधु कांबीकर ने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया और अपनी दमदार अदाकारी से पहचान बनाई। वह अभिनेता नाना पाटेकर के साथ भी स्क्रीन साझा कर चुकी थीं। उन्होंने ‘शोला और शबनम’, ‘हम दोनों’ और ‘यशवंत’ जैसी फिल्मों में काम किया था। ‘हम दोनों’ और ‘यशवंत’ में उन्होंने नाना पाटेकर की मां का किरदार निभाया था। इन फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। सहायक भूमिकाओं में भी वह अपने सहज अभिनय और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के कारण अलग पहचान बनाने में सफल रहीं।
लावणी नृत्य से बनाई थी खास पहचान
मधु कांबीकर केवल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक कुशल लावणी कलाकार भी थीं। लावणी महाराष्ट्र की लोकप्रिय लोक कला है, जिसमें संगीत, नृत्य और अभिनय का अनूठा मेल देखने को मिलता है। मधु कांबीकर ने इस कला के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई और लोक कला प्रेमियों के बीच लोकप्रियता हासिल की। उनके करियर में नवंबर 2016 एक बड़ा मोड़ लेकर आया था। बताया जाता है कि एक डांस परफॉर्मेंस के बाद उन्हें स्ट्रोक आया था। इसके बाद उनके दाहिने हाथ की संवेदना प्रभावित हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस स्वास्थ्य समस्या के बाद वह धीरे-धीरे अभिनय और मंचीय प्रस्तुतियों से दूर हो गई थीं।
मधु कांबीकर का योगदान हमेशा रहेगा याद
मधु कांबीकर का निधन मराठी सिनेमा और लोक कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने अभिनय और लावणी नृत्य के माध्यम से दर्शकों के बीच जो पहचान बनाई, वह लंबे समय तक याद की जाएगी। उनके प्रशंसक और कला जगत से जुड़े लोग उन्हें एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री और लोक कला की समर्पित कलाकार के रूप में याद कर रहे हैं।


