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Retail Inflation: सितंबर में महंगाई का बड़ा झटका, 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई दर; प्याज की कीमतों में 108% का उछाल

देश में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं, खाद्य महंगाई दर में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली, जबकि लहसुन और नींबू भी महंगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का दबाव शहरी इलाकों के मुकाबले ज्यादा रहा।

सितंबर में बढ़ी खुदरा महंगाई दर

सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। इससे पहले अगस्त में यह दर 4.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। महंगाई बढ़ने से आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर रोजाना इस्तेमाल होने वाली सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल का असर सीधे रसोई के खर्च पर पड़ता है।

खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हुई

सितंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित खाद्य महंगाई दर अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। सब्जियों और रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से घरेलू खर्च बढ़ने की आशंका है। खुदरा महंगाई दर में इस उछाल के बाद मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई है। हालांकि, यह केंद्रीय बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सहनशीलता सीमा के भीतर है।

प्याज की महंगाई दर 108 प्रतिशत के पार

सितंबर में प्याज की कीमतों ने सबसे ज्यादा चौंकाया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्याज की महंगाई दर अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 108.09 प्रतिशत हो गई। इस तेज उछाल ने घरेलू रसोई का बजट बिगाड़ने की चिंता बढ़ा दी है।

प्याज के अलावा लहसुन और नींबू की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई।

  • प्याज: महंगाई दर 48.78 प्रतिशत से बढ़कर 108.09 प्रतिशत।
  • लहसुन: महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत।
  • नींबू: महंगाई दर 15.15 प्रतिशत से बढ़कर 36.41 प्रतिशत।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने सितंबर में खाद्य महंगाई को ऊपर धकेलने में भूमिका निभाई।

आलू और टमाटर की कीमतों में मिली राहत

जहां प्याज, लहसुन और नींबू की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, वहीं आलू और टमाटर के मामले में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 11.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह टमाटर की कीमतें भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.62 प्रतिशत कम रहीं।

हालांकि, कुछ सब्जियों के सस्ते होने के बावजूद खाद्य महंगाई दर में बढ़ोतरी से यह राहत सीमित रह सकती है।

ग्रामीण इलाकों में 6 प्रतिशत के पार पहुंची महंगाई

सितंबर में महंगाई का असर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिला। ग्रामीण खुदरा महंगाई दर अगस्त के 5.24 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 6.08 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.31 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर का 6 प्रतिशत के पार पहुंचना बताता है कि वहां रहने वाले परिवारों पर कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ा है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच अंतर के पीछे अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों और उपभोग के पैटर्न की भूमिका भी हो सकती है।

चांदी के गहनों की महंगाई दर भी ऊंचे स्तर पर

खाद्य वस्तुओं के अलावा चांदी के गहनों की कीमतों में भी तेज सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में चांदी के गहनों की महंगाई दर 87.80 प्रतिशत रही। हालांकि, अगस्त में दर्ज 106.81 प्रतिशत की तुलना में इसमें कमी आई। इससे पता चलता है कि सितंबर में कुछ वस्तुओं की कीमतों में राहत के संकेत मिले, लेकिन खाद्य पदार्थों की महंगाई ने कुल खुदरा मुद्रास्फीति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की खरीदारी क्षमता और घरेलू बजट पर पड़ सकता है। जब खाद्य पदार्थ महंगे होते हैं, तो परिवारों को अपनी आय का अधिक हिस्सा रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च करना पड़ता है। महंगाई के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। केंद्रीय बैंक महंगाई के रुझान को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों और अन्य नीतिगत फैसलों पर विचार करता है। हालांकि, आगे महंगाई किस दिशा में जाएगी, यह खाद्य वस्तुओं की कीमतों, आपूर्ति की स्थिति और घरेलू एवं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

नोट: इस खबर में दिए गए महंगाई संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराई गई मूल सामग्री पर आधारित हैं। प्रकाशन से पहले सितंबर के आधिकारिक CPI आंकड़ों और RBI की रेपो रेट संबंधी जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

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