नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के पहले से दिए गए जमानत आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद करीब सात वर्ष बीत चुके हैं। ऐसे में इस स्तर पर जमानत आदेश में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने हालांकि झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले की लंबित सुनवाई में तेजी लाए।
CBI ने कोर्ट में क्या दलील दी?
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने दलील दी कि लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। बाद में हाई कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि उन्होंने अपनी सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है। सीबीआई का कहना था कि यह गणना सही नहीं थी, क्योंकि अलग-अलग मामलों में दी गई सजाओं को एक साथ चलने वाली सजा मान लिया गया, जबकि ऐसा नहीं था। इसी आधार पर एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द करने की मांग की थी।
क्या है देवघर चारा घोटाला मामला?
देवघर चारा घोटाला, बहुचर्चित 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला मामलों में से एक है। यह मामला बिहार के पशुपालन विभाग से फर्जी बिलों और दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने से अवैध निकासी से जुड़ा है। घोटाले का खुलासा जनवरी 1996 में विभाग पर हुई छापेमारी के बाद हुआ था। इसके बाद जून 1997 में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव को आरोपी बनाया। यह कथित घोटाला 1992 से 1995 के बीच उस समय हुआ, जब लालू यादव अविभाजित बिहार के मुख्यमंत्री थे और वित्त एवं पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
पांच मामलों में हो चुकी है सजा
लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले से जुड़े पांच अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें सजा भी सुनाई गई है। फिलहाल वे खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से उनकी जमानत बरकरार रहेगी, जबकि मामले की आगे की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहेगी।


