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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का टेक्सटाइल सेक्टर बना दुनिया की पहली पसंद, 550 जिलों से हो रहा निर्यात

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का टेक्सटाइल (वस्त्र) उद्योग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को देश के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन ‘भारत टेक्स-2026’ (Bharat Tex-2026) के तीसरे संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार की निर्यात विविधीकरण नीति और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की रणनीति ने भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाई है।

550 जिलों से दुनिया के बाजारों तक पहुंच रहे भारतीय वस्त्र

गिरिराज सिंह ने बताया कि आज भारत के 550 जिलों से वस्त्र उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्यात बढ़ाने के लिए 40 प्रमुख देशों को लक्ष्य बनाकर रणनीति तैयार की है, जिसका सकारात्मक असर टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर साफ दिखाई दे रहा है। मंत्री के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद भारत के वस्त्र निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है और देश दुनिया के प्रमुख सप्लाई हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

Bharat Tex-2026 में 130 देशों की भागीदारी

इस बार भारत टेक्स-2026 में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बांग्लादेश समेत 130 देशों के खरीदार, उद्योग प्रतिनिधि और निवेशक हिस्सा ले रहे हैं। मंत्री ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी यह साबित करती है कि भारत वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग का भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।

FTA से मिलेगा निर्यात को बड़ा फायदा

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में गिरिराज सिंह ने बताया कि भारत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) कर चुका है, जबकि कई अन्य देशों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से भारतीय वस्त्र उत्पादों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य भारतीय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार करना है।

MSME की मजबूत भागीदारी

मंत्री ने बताया कि भारत टेक्स-2026 में शामिल 90 प्रतिशत से अधिक प्रदर्शक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट होता है कि देश का टेक्सटाइल सेक्टर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यम भी तेजी से वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।

900 अरब डॉलर के वैश्विक बाजार पर भारत की नजर

गिरिराज सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर वस्त्र आयात का बाजार लगभग 900 अरब अमेरिकी डॉलर का है। भारत इस विशाल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार सुगमता बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहन देने और एफटीए के माध्यम से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा भारत

चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे वैश्विक खरीदारों के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इस बार आयोजन में केवल खरीदार ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक भी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि तिरुपुर, सूरत, इचलकरंजी, पानीपत और लुधियाना जैसे प्रमुख वस्त्र उत्पादन केंद्र कारोबार सुगमता और बेहतर औद्योगिक माहौल के कारण तेजी से विकसित हो रहे हैं। साथ ही सरकार ने अक्टूबर तक कपास पर आयात शुल्क समाप्त कर उद्योग को अतिरिक्त राहत देने का फैसला किया है।

2030 तक 350 अरब डॉलर के टेक्सटाइल बाजार का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर के टेक्सटाइल बाजार का लक्ष्य तय किया है। इसमें 100 अरब डॉलर का निर्यात और 250 अरब डॉलर का घरेलू बाजार शामिल होगा। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में देश का घरेलू वस्त्र बाजार लगभग 138 अरब डॉलर का था, जो अब बढ़कर करीब 190 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि भारत के टेक्सटाइल उद्योग की तेज रफ्तार और मजबूत संभावनाओं को दर्शाती है।

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