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जया किशोरी बोलीं- भगवान का सम्मान करें, ‘सॉरी’ गलतियों का लाइसेंस नहीं

आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचिका जया किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए। कथा के दौरान पूरा पंडाल ‘राधे-कृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।

भगवान की लीलाओं को सांसारिक नहीं, भगवत दृष्टि से देखें

कथा के दौरान जया किशोरी ने कहा कि भगवान की लीलाओं को सामान्य मानवीय दृष्टि से नहीं, बल्कि भगवत दृष्टि से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग कठिन समय में भगवान को याद करते हैं, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल होते ही उन्हें भूल जाते हैं या उनका उपहास करने लगते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यदि हम स्वयं अपने आराध्य का सम्मान नहीं करेंगे, तो समाज भी उनका सम्मान नहीं करेगा। साथ ही भगवान के नाम पर किए जाने वाले अनुचित मजाक का विरोध करने और ऐसी सभाओं से दूर रहने का संकल्प भी दिलाया।

कंस वध प्रसंग पर गूंजे जयकारे

जैसे ही कथा में कंस वध का प्रसंग आया और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन हुआ, श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा कथा पंडाल ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गूंज उठा।

परिश्रम से कमाया धन ही वास्तविक संपत्ति

कथा व्यास ने कहा कि जीवन में ईमानदारी और परिश्रम से अर्जित धन ही वास्तविक संपत्ति है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकार का हनन नहीं करना चाहिए और सदैव धर्म एवं नैतिकता के मार्ग पर चलना चाहिए। कथा के अंत में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव का मनोहारी प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

‘सॉरी’ गलतियों का लाइसेंस नहीं

सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर अपने विचार रखते हुए जया किशोरी ने कहा कि आज के समय में ‘सॉरी’ शब्द को कई युवा गलतियों का लाइसेंस समझने लगे हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रेम का वास्तविक अर्थ सम्मान, विश्वास और जिम्मेदारी है। विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है, इसलिए इसे जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी समझदारी और परिपक्वता के साथ करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बेटा और बेटी दोनों को जीवन की जिम्मेदारियों के लिए समान रूप से तैयार करना परिवार की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में रहे मौजूद

कथा के दौरान बाबू रोशनलाल गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, राधा गुप्ता, विकास मांगलिक, जयश्री मांगलिक, अनिल गुप्ता, विनीत मांगलिक, ऋषिक मांगलिक, अर्पित गुप्ता, अंजू मांगलिक, तनु मांगलिक, रेखा गुप्ता और आकांक्षा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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