रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विधानसभा मार्च किया। इसी बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते को CID ने गिरफ्तार कर लिया।
ख्यांगते से इस मामले में CID पहले ही कई दौर की पूछताछ कर चुकी थी। रिपोर्टों के मुताबिक उनसे चार बार पूछताछ हुई और प्रत्येक पूछताछ कई घंटे चली। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद ख्यांगते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। अब उनकी गिरफ्तारी ने छात्रों के आंदोलन को और धार दे दी है।
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में ED की भी एंट्री
मामला अब केवल राज्य की जांच एजेंसी तक सीमित नहीं रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच शुरू कर दी है। एजेंसी की जांच का फोकस कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं पर है। छात्रों की सबसे बड़ी मांग JSSC-CGL समेत संबंधित भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र और पूरी CBI जांच कराने की है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें राज्य की एजेंसियों की जांच पर पर्याप्त भरोसा नहीं है।
रांची में विधानसभा मार्च के दौरान हंगामा
सोमवार सुबह प्रदर्शनकारी छात्र पुराने विधानसभा भवन से नए विधानसभा भवन की ओर मार्च के लिए निकले। विधानसभा की ओर बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड्स पार कर दिए। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब छात्र विधानसभा के नजदीक पहुंच गए और सुरक्षा घेरे के अंतिम बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बावजूद स्थिति बड़े पैमाने पर हिंसक नहीं हुई। प्रशासन ने विधानसभा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर रखी थी।
17 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं अभ्यर्थी
JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले 17 दिनों से लगातार जारी है। खराब मौसम और प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अभ्यर्थी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। वे JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और कथित परीक्षा धांधली की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है। इसलिए वे दोषियों पर कार्रवाई के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग कर रहे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच नहीं बनी सहमति
आंदोलन के दौरान राज्य सरकार की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के कई दौर हुए हैं। सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और करीब 98 फीसदी मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार का यह दावा उनकी वास्तविक मांगों से मेल नहीं खाता। उनके मुताबिक जब तक परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और जरूरी सुधारों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- JSSC-CGL परीक्षा की स्वतंत्र CBI जांच
- कथित धांधली वाली परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच
- दोषी अधिकारियों और परीक्षा से जुड़े लोगों पर कार्रवाई
- JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
- परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार
- अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट और जवाबदेह भर्ती प्रक्रिया
- कथित अनियमितताओं से प्रभावित परीक्षाओं पर उचित निर्णय
ख्यांगते की गिरफ्तारी के बाद क्या बदलेगा?
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते की गिरफ्तारी इस पूरे मामले की जांच में अहम घटनाक्रम मानी जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद भी छात्रों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारी अब भी CBI जांच और JPSC-JSSC में बड़े सुधार की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही CID और ED की जांच से सामने आने वाले तथ्य भी यह तय करने में अहम होंगे कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की जिम्मेदारी किन लोगों पर बनती है।


