नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने CBSE से नीति पर दोबारा विचार करने और कक्षा 6 के छात्रों को संभावित राहत देने के विकल्प तलाशने को कहा। सुनवाई के दौरान अंग्रेजी को ‘नॉन-नेटिव’ या गैर-मूल भाषा मानने की अवधारणा पर भी सवाल उठाए गए।
‘नेटिव’ शब्द के इस्तेमाल पर जस्टिस बागची की आपत्ति
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ‘नेटिव’ शब्द के इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस शब्द में औपनिवेशिक सोच की झलक दिखाई देती है। उनके अनुसार, भाषा के संदर्भ में ‘इंडिजिनस’ यानी देशज या स्वदेशी शब्द अधिक उपयुक्त हो सकता है। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि भारत में अंग्रेजी के लंबे ऐतिहासिक विकास और भारतीय समाज में उसकी गहरी मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए यह संवैधानिक सवाल भी महत्वपूर्ण है कि अंग्रेजी को किस हद तक गैर-देशज भाषा माना जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाषा नीति बनाना सरकार और संबंधित संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता की समीक्षा अदालत कर सकती है।
कक्षा 6 से तीसरी भाषा लागू करने पर चुनौती
CBSE के तीन भाषा फॉर्मूले के तहत कक्षा 6 से तीसरी भाषा पढ़ाए जाने को लेकर स्कूलों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। इनमें पर्याप्त भाषा शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षण सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और स्कूलों को तैयारी के लिए मिलने वाला समय प्रमुख मुद्दे हैं। संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि तीसरी भाषा लागू करने से पहले स्कूलों की वास्तविक जरूरतों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया। ऐसे में नई भाषा व्यवस्था को लागू करना कई संस्थानों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
R1, R2 और R3 के जरिए भाषा व्यवस्था में बदलाव
शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर तीन भाषा फॉर्मूले में ढांचागत बदलाव किए हैं। इसके तहत R1, R2 और R3 भाषा ढांचा तैयार किया गया है। सरकार की ओर से भाषा आधारित शिक्षा को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी महत्वपूर्ण विषयों की किताबों का 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा ब्रिज कोर्स और ई-कंटेंट भी तैयार किए गए हैं, ताकि छात्रों को अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाई के बीच बदलाव करने में परेशानी न हो।
‘जादुई पिटारा’ और ‘भाषा संगम’ से भाषा सीखने पर जोर
छोटे बच्चों के लिए पढ़ाई को अधिक रोचक बनाने के उद्देश्य से ‘जादुई पिटारा’ जैसे खेल आधारित लर्निंग किट तैयार किए गए हैं। ये किट 22 भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, देशभर के बच्चों को अलग-अलग भारतीय भाषाओं से परिचित कराने के लिए ‘भाषा संगम’ कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के सहयोग से 121 मातृभाषा प्राइमर तैयार किए गए हैं। केंद्रीय विद्यालयों सहित कुछ संस्थानों में स्थानीय भाषाओं की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए संविदा पर स्थानीय भाषा शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान भी किया गया है।
क्या कक्षा 6 के छात्रों को मिलेगी राहत?
सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CBSE अपनी तीन भाषा नीति में बदलाव करेगा या कक्षा 6 के छात्रों के लिए इसे लागू करने में कुछ राहत दी जाएगी। स्कूलों में भाषा शिक्षकों और संसाधनों की कमी को देखते हुए नीति को लागू करने के तरीके पर दोबारा विचार की मांग तेज हो सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय CBSE और संबंधित सरकारी संस्थाओं की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा।


