रामपुर। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर प्रशासन ने दो बड़े कदम उठाए हैं। पहला, विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बनी करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है। दूसरा, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें 20 दिनों के भीतर हटाने का आदेश जारी किया है।
PWD ने सड़क को घोषित किया सार्वजनिक मार्ग
लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि यह सड़क विभाग की संपत्ति है और अब इस पर आम जनता का आवागमन होगा। विभाग के अनुसार सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण सरकारी धन से कराया गया था, इसलिए इसका उपयोग किसी निजी संस्थान तक सीमित नहीं रह सकता। PWD के अधिशासी अभियंता केवी सिंह ने बताया कि सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया गया है और अब इस रास्ते से कोई भी नागरिक आवाजाही कर सकेगा।
13 करोड़ रुपये से हुआ था सड़क का चौड़ीकरण
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2003-04 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय के प्रस्तावित मानचित्र के अनुसार इस सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद 2016 में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत सड़क के चौड़ीकरण के लिए 17 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, जबकि 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क का विस्तार किया गया।
2019 की जांच में उठे थे सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल
वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी बजट के उपयोग को लेकर शिकायत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने नौ सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच में निजी विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी धन से कराए गए विकास कार्यों के दस्तावेज सामने आए थे। तत्कालीन डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।
RDA का नोटिस, 38 भवनों को बताया अवैध
इधर, रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 भवनों में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित बताते हुए अवैध घोषित किया है। आरडीए के उपाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने व्यक्तिगत सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिनों के भीतर स्वयं निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद यदि भवन नहीं हटाए गए तो प्राधिकरण स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और पूरा खर्च संबंधित पक्ष से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
सिर्फ दो भवनों को मिली राहत
आरडीए के अनुसार, कार्रवाई लागू होने की स्थिति में परिसर में केवल मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक ही सुरक्षित रहेंगे। प्राधिकरण का कहना है कि इन दोनों भवनों के मानचित्र स्वीकृत हैं, जबकि बाकी 38 भवनों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
इन 38 भवनों का कुल निर्मित क्षेत्रफल 82,309.80 वर्गमीटर बताया गया है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर राजस्व ग्राम सींगनखेड़ा में स्थित है, जिसे 27 सितंबर 2024 को रामपुर विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल किया गया। प्रबंधन का दावा है कि जब अधिकांश निर्माण कार्य हुए, तब यह क्षेत्र न तो रामपुर विनियमित क्षेत्र में शामिल था और न ही आरडीए के अधिकार क्षेत्र में आता था। इसलिए उस समय प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी।
सुनवाई में कौन-कौन रहा मौजूद
व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. नूर-उस-सलाम और अधिवक्ता नासिर सुल्तान उपस्थित रहे। वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से सचिव डॉ. नितिन मदान, विशेष कार्याधिकारी कुमार संजय, तहसीलदार रणबीर सिंह तथा अवर अभियंता रवि शंकर मौजूद रहे।
मुख्य बातें (Highlights)
- PWD ने जौहर यूनिवर्सिटी की 3.5 किमी सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित किया।
- सड़क के चौड़ीकरण पर सरकारी खजाने से 13 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए थे।
- RDA ने विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध बताते हुए 20 दिन में हटाने का आदेश दिया।
- कार्रवाई के बाद केवल मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक बचने की संभावना।
- विश्वविद्यालय का दावा—निर्माण के समय क्षेत्र RDA की सीमा में शामिल नहीं था।


