बरेली। चौकी चौराहा स्थित सिटी सेंटर LA मॉल में रविवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बिजली गुल होने के बाद मॉल की लिफ्ट बीच रास्ते में अटक गई, जिससे उसमें सवार 13 लोग करीब 35 मिनट तक फंसे रहे। भीषण गर्मी और उमस के कारण लिफ्ट में मौजूद लोगों की हालत खराब हो गई और एक किशोरी बेहोश हो गई। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा तोड़कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बिजली कटते ही लिफ्ट में कैद हुए लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लिफ्ट तीसरी मंजिल से बेसमेंट की ओर जा रही थी, तभी अचानक बिजली चली गई। ऑटो रेस्क्यू डिवाइस की मदद से लिफ्ट फर्स्ट फ्लोर पर आकर रुक गई, लेकिन उसका दरवाजा नहीं खुला। अंदर मौजूद लोग मदद के लिए लगातार आवाज लगाते रहे, जबकि बाहर मौजूद लोगों ने उन्हें हिम्मत बंधाई।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद मॉल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, रात के समय लिफ्ट बिना ऑपरेटर के संचालित की जा रही थी। लिफ्ट में मौजूद लोगों का आरोप है कि अलार्म बटन और कॉलिंग सिस्टम भी काम नहीं कर रहे थे। ऐसे में मदद मिलने में देरी हुई और घबराए लोगों ने दरवाजा खोलने के लिए जोर-आजमाइश शुरू कर दी।
सेंसर खराब होने से बढ़ी परेशानी
मॉल प्रबंधन का कहना है कि लिफ्ट में फंसे लोगों द्वारा दरवाजे को लात मारने और पीटने के कारण सेंसर ने काम करना बंद कर दिया। इसी वजह से जनरेटर चालू होने के बाद भी लिफ्ट का गेट नहीं खुल सका और लोग अंदर ही फंसे रहे।
स्थानीय लोगों ने निभाई अहम भूमिका
लिफ्ट के अंदर से मदद की आवाजें सुनकर बाहर मौजूद लोगों ने राहत कार्य शुरू किया। राजेंद्र निगम, जितेंद्र सक्सेना, अमन सिंह समेत कई लोगों ने सिक्योरिटी गार्ड को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल कोई मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में लोगों ने लोहे की रॉड की मदद से लिफ्ट का दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला।
बच्चों और महिलाओं की बिगड़ी हालत
लिफ्ट में फंसी हरनीत कौर ने बताया कि वह अपने परिवार और छोटे बच्चों के साथ मॉल आई थीं। गर्मी और उमस के कारण बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। इसी दौरान एक किशोरी बेहोश हो गई, जिसे बाहर निकालने के बाद पानी पिलाकर और प्राथमिक सहायता देकर होश में लाया गया। उन्होंने बताया कि कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो उनकी जान खतरे में पड़ गई हो, लेकिन बाहर मौजूद लोगों की मदद से सभी सुरक्षित बाहर निकल सके।
मॉल प्रबंधन की सफाई
मॉल के ऑपरेशन मैनेजर विदित कुमार भार्गव ने बताया कि सुरक्षा के लिए 12 गार्ड तैनात थे और सूचना मिलते ही कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि जिस नंबर पर लोग कॉल कर रहे थे, वह फोन एक गार्ड के पास था, जो घटनास्थल पर पहुंचने के दौरान कॉल रिसीव नहीं कर सका। बाहर आने के बाद सभी लोगों को पानी उपलब्ध कराया गया और स्वास्थ्य की जांच की गई।
ऑटो रेस्क्यू डिवाइस बनी सहारा
विशेषज्ञों के अनुसार, लिफ्ट में लगी ऑटो रेस्क्यू डिवाइस की वजह से बड़ा हादसा टल गया। इसी सिस्टम ने बिजली जाने के बाद लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर तक पहुंचाकर रोक दिया। उत्तर प्रदेश लिफ्ट एवं एस्केलेटर अधिनियम के तहत सभी लिफ्टों में ऐसी डिवाइस लगाना अनिवार्य है।


