पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक ही मामले से लगातार जजों के खुद को अलग (रिक्यूज) करने की घटनाओं ने देश की न्यायपालिका का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन की सेवा समाप्ति से जुड़े मामले में अब तक चार जज सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमरीश कुमार जैन के मामले से 4 जज हुए अलग
अमरीश कुमार जैन ने वर्ष 2022 में अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस मामले में अब तक जस्टिस लिसा गिल, जस्टिस अश्वनी मिश्रा, जस्टिस दीपक सिबल और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Sheel Nagu समेत चार न्यायाधीश सुनवाई से अलग हो चुके हैं। लगातार हो रहे रिक्यूजल ने न्यायिक प्रक्रिया और मामलों के निस्तारण की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग करते हुए अमरीश कुमार जैन ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि दो जजों की एक डिवीजन बेंच गठित की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 13 जुलाई से मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हो और फैसला सुरक्षित होने तक सुनवाई लगातार जारी रखी जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी परिस्थिति में जज खुद को मामले से अलग न करें।
वकीलों को भी मिली चेतावनी
सुनवाई के दौरान CJI ने कुछ वरिष्ठ वकीलों के रवैये पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ “तथाकथित वरिष्ठ वकील” अदालतों में ऐसा माहौल बना रहे हैं जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी जज पर सुनवाई से अलग होने का दबाव बनाने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
संजीव चतुर्वेदी का मामला भी बना था चर्चा का विषय
यह पहला अवसर नहीं है जब किसी मामले में बड़ी संख्या में जजों ने खुद को अलग किया हो। वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी Sanjiv Chaturvedi की अवमानना याचिका में भी ऐसा ही देखने को मिला था। उस मामले में अलग-अलग समय पर कुल 16 न्यायाधीश सुनवाई से अलग हो गए थे। 8 अक्टूबर 2025 को न्यायमूर्ति वर्मा ने भी बिना कारण बताए मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए आदेश दिया था कि केस को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। इससे पहले भी 15 अन्य न्यायाधीश विभिन्न चरणों में सुनवाई से अलग हो चुके थे।
अतीक अहमद मामले में भी सामने आई थी ऐसी स्थिति
इससे पहले गैंगस्टर Atiq Ahmed से जुड़े एक मामले में भी लगभग 10 न्यायाधीशों ने सुनवाई करने से इनकार किया था। अब अमरीश कुमार जैन का मामला भी लगातार रिक्यूजल के कारण चर्चा के केंद्र में है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
किसी भी न्यायिक व्यवस्था में जजों का बार-बार किसी केस से अलग होना असाधारण स्थिति माना जाता है। ऐसे मामलों में सुनवाई में देरी होती है और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा प्रभावशीलता पर बहस शुरू हो जाती है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए समयबद्ध सुनवाई और न्यायिक निरंतरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


