ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल के रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसकी वजह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वह बयान है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर चुनौती का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल सरकार के कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने ईरान के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाने की वकालत की है। उनका मानना है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय किए बिना किसी भी तरह का समझौता प्रभावी नहीं होगा।
इजराइल के वित्त मंत्री Bezalel Smotrich और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि ईरान के खिलाफ दबाव बनाए रखना जरूरी है। दोनों नेता प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सरकार के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। इसी मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने कथित तौर पर कहा कि किसी भी देश के लिए अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल दुश्मनों को खत्म करने में नहीं हो सकता। उनके इस बयान को कई विश्लेषक अमेरिका की ओर से इजराइल को दिया गया एक स्पष्ट संदेश मान रहे हैं।
क्या अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं?
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की प्राथमिकताएं हमेशा पूरी तरह समान नहीं रही हैं। जहां इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है, वहीं अमेरिका कई बार सैन्य विकल्पों के साथ-साथ कूटनीतिक रास्तों को भी खुला रखने की कोशिश करता रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या वॉशिंगटन अब मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में नई रणनीति अपना रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग अभी भी मजबूत माना जाता है, लेकिन ईरान नीति को लेकर दृष्टिकोण में अंतर खुलकर सामने आने लगा है।
Middle East Crisis: आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के मुद्दे पर किस हद तक एकजुट रहते हैं। फिलहाल जेडी वेंस की टिप्पणी ने यह संकेत जरूर दिया है कि वॉशिंगटन केवल सैन्य कार्रवाई को समाधान मानने के पक्ष में नहीं दिख रहा।


