कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने CMRL-एक्सलॉजिक वित्तीय लेन-देन मामले में अहम आदेश देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीना तथा उनके पति और विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से केरल पुलिस के साथ साझा की गई जानकारी से संबंधित है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह आदेश वकील के.एम. शाहजहां की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने ED से मिली जानकारी के आधार पर सीधे FIR दर्ज करने के बजाय शुरुआती जांच कराने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।
क्या है CMRL-एक्सलॉजिक वित्तीय लेन-देन मामला?
यह पूरा विवाद कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और टी. वीना की कंपनी एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। ED की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, CMRL ने वीना की कंपनी को करीब 3.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। एजेंसी को संदेह है कि इन भुगतानों के बदले कथित तौर पर कोई वास्तविक सेवा नहीं दी गई। ED ने इन लेन-देन की भ्रष्टाचार के संभावित पहलू से अलग जांच कराने की मांग की थी। एजेंसी को आशंका है कि भुगतान किसी कथित रिश्वतखोरी समझौते का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है।ED की रिपोर्ट पर FIR के बजाय SIT जांच का फैसला
मामले में ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 66(2) के तहत जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी केरल पुलिस प्रमुख के साथ साझा की थी। एजेंसी ने संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल FIR दर्ज करने के बजाय मामले की शुरुआती जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। इस टीम की अगुवाई क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एच. वेंकटेश कर रहे थे। याचिकाकर्ता के.एम. शाहजहां ने इसी फैसले पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। उनका तर्क था कि ED की ओर से साझा की गई जानकारी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और PMLA के तहत संभावित अपराधों की जांच के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।
मामले की जांच VACB को सौंपने की भी मांग
याचिका में शाहजहां ने अदालत से अनुरोध किया था कि जांच विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) को सौंपी जाए। उन्होंने राज्य पुलिस और विजिलेंस निदेशक को 22 सितंबर को दी गई शिकायतों पर कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग भी की थी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल जाजू बाबू ने याचिका की स्वीकार्यता पर शुरुआती आपत्ति जताई। उन्होंने दलील दी कि ED की ओर से जानकारी साझा किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि राज्य की जांच एजेंसी उसकी स्वतंत्र जांच नहीं कर सकती। राज्य का पक्ष था कि संबंधित सामग्री का परीक्षण करके यह निर्धारित किया जा सकता है कि FIR दर्ज करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार मौजूद है या नहीं।
पिनराई विजयन परिवार से जुड़े मामले में आगे क्या होगा?
केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद CMRL और एक्सलॉजिक के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण चरण में पहुंच सकती है। मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या संबंधित भुगतानों के पीछे वास्तविक व्यावसायिक सेवाएं थीं या उनमें भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई पहलू मौजूद था। हालांकि, FIR दर्ज होना या जांच का आदेश दिया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका और आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।


