कुशीनगर: नारायणी नदी में अचानक बढ़े जलस्तर और एपी तटबंध टूटने से कुशीनगर के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। स्थिति का जायजा लेने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने तटबंध टूटने वाले स्थान का हवाई सर्वेक्षण किया और बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री किट और लंच पैकेट वितरित किए तथा प्रभावित लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
नेपाल से आए पानी ने बढ़ाई नारायणी नदी की रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कई वर्षों बाद क्षेत्र में इस तरह की गंभीर बाढ़ की स्थिति बनी है। नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया, जिससे नारायणी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। सामान्य दिनों में नारायणी नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह रहता है, जबकि बाढ़ के दौरान यह बढ़कर करीब 5.5 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। जलप्रवाह में अचानक हुई इस बढ़ोतरी के चलते एपी तटबंध टूट गया और आसपास के कई गांवों में पानी पहुंच गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीद है कि जल्द ही हालात में सुधार होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरी सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में पूरी क्षमता से जुटा है।
NDRF-SDRF की टीमें तैनात
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। मौके पर NDRF की दो टीमें, SDRF की दो टीमें और PAC की फ्लड यूनिट तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन के साथ सिंचाई विभाग के अधिकारी और अभियंता भी प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्य शुरू कर दिया गया है।
5,000 राहत पैकेट उपलब्ध, करीब 50 किलो है एक किट का वजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 5,000 राहत सामग्री पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं। प्रत्येक पैकेट में करीब 35 तरह की आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। एक राहत किट में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो दाल, लाई, चना, तेल, मसाले, नमक और बाल्टी समेत अन्य जरूरी सामान शामिल है। प्रत्येक पैकेट का वजन करीब 50 किलो है।
जनहानि पर 4 लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि बाढ़ के दौरान किसी व्यक्ति की जनहानि हुई है तो संबंधित परिवार को आपदा राहत के तहत तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। जनहानि की स्थिति में 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। वहीं, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त और मरम्मत योग्य मकानों के लिए भी आवश्यक आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
10 दिन में फसल नुकसान का मुआवजा देने के निर्देश
बाढ़ से करीब 15 से 16 गांवों में फसल प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। धान, गन्ना और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को फसल क्षति का सर्वे जल्द पूरा कराने और प्रभावित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुआवजा वितरण में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने और टूटे तटबंध को मजबूत करने के निर्देश भी सिंचाई विभाग को दिए गए।
बाढ़ के बाद बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य शिविर
मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों में अगले 5 से 6 दिनों तक स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को जरूरी दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने विशेष रूप से प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-स्नेक वेनम और एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में किसी मरीज को उपचार या वैक्सीन के लिए इंतजार न करना पड़े।
राहत शिविरों में भोजन, बिजली और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था
जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है या जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में पका हुआ भोजन, बिजली और प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। बिजली आपूर्ति संभव नहीं होने पर जनरेटर के माध्यम से रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
नारायणी नदी की ड्रेजिंग से स्थायी समाधान पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल राहत के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए स्थायी समाधान पर भी जोर दिया। उन्होंने नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन की संभावनाओं पर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि नदी से निकलने वाली सिल्ट को दोनों किनारों पर डाला जा सकता है, जिससे नदी का चैनल गहरा और व्यवस्थित होगा। इससे आसपास के किसानों के खेतों को नुकसान से बचाने में भी मदद मिल सकती है और भविष्य में बाढ़ का खतरा कम करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
ये रहे मौजूद
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद शशांक मणि और विजय कुमार दूबे, विधायक डॉ. असीम कुमार और सुरेंद्र कुमार कुशवाहा सहित प्रशासनिक अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।


