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चुनाव से पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का दावा

श्रीनगर/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। चुनावी व्यवस्था के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दावे सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रावलकोट और सुधनोती के बीच हुई फायरिंग में 8 प्रदर्शनकारियों की मौत और कई लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

मुजफ्फराबाद मार्च रोकने के दौरान झड़प

रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद की ओर जनमार्च के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान रावलकोट बस स्टैंड के आसपास सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और फायरिंग किए जाने के भी दावे किए गए हैं। आंदोलन में महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी बताई जा रही है।

12 आरक्षित सीटों को लेकर क्यों भड़का आंदोलन?

PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के लाहौर, कराची और रावलपिंडी जैसे शहरों में रहते हैं। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इन आरक्षित सीटों के जरिए इस्लामाबाद अपनी पसंद की सरकार बनवाता है। प्रदर्शनकारी इस व्यवस्था में बदलाव और स्थानीय जनता की भागीदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

36 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन

आंदोलनकारी संगठनों का दावा है कि पिछले 36 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं के बंद होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि, इन सभी दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सैकड़ों गिरफ्तार, संचार सेवाएं प्रभावित होने का दावा

प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि आंदोलन को दबाने के लिए बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। साथ ही कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बाधित होने के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवश्यक सुविधाओं की मांग करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।

भारत ने जताई चिंता

भारत पहले भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त करता रहा है। भारत ने क्षेत्र में नागरिकों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों को रोकने की अपील की है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • 27 जुलाई को PoK में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित।
  • प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में 8 मौतों का दावा, स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
  • 12 आरक्षित सीटों के विरोध में कई सप्ताह से आंदोलन जारी।
  • आंदोलनकारी संगठनों का दावा—36 दिनों में 80 से अधिक लोगों की मौत।
  • इंटरनेट बंद, सैकड़ों गिरफ्तार किए जाने के आरोप।
  • नोट: इस खबर में शामिल मौतों, फायरिंग और गिरफ्तारियों से जुड़े कई दावे स्थानीय संगठनों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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