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अवैध डेयरी यूनिट पर खाद्य विभाग का छापा, 200 किलो मिलावटी पनीर और दूषित दूध नष्ट, जांच के लिए भेजे गए नमूने

आगरा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने आगरा के किरावली क्षेत्र के कुकथला गांव में संचालित एक अवैध डेयरी निर्माण इकाई पर छापा मारकर बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान करीब 200 किलो मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पनीर व दूध बरामद किया गया, जिसे मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। साथ ही घी, दूध और पनीर के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग को अवैध रूप से डेयरी उत्पाद तैयार किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों रविंद्र कुमार परिहार, राकेश कुमार, आशुतोष सिंह और अमित कुमार की टीम ने कुकथला गांव स्थित एक मकान में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां संचालक शिव कुमार मौजूद मिला।

जांच में सामने आया कि निर्माण इकाई बिना किसी वैध लाइसेंस के संचालित की जा रही थी। परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई थी और कर्मचारी बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए काम कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान ड्रमों में रखा मिश्रित दूध मिला, जिसमें मक्खियां और मच्छर पड़े हुए थे। वहीं, खुले में रखा पनीर भी दुर्गंधयुक्त पाया गया।

खाद्य विभाग की टीम को मौके से करीब 40 किलो घी भी बरामद हुआ। अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि दूध से क्रीम निकालने के बाद बचे हुए मिश्रित दूध से पनीर तैयार किया जा रहा था, जबकि निकाली गई क्रीम से घी बनाकर बाजार में बेचा जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाए जाने पर विभाग ने लगभग 50 किलो पनीर और 150 लीटर मिश्रित दूध को नष्ट करा दिया। नष्ट किए गए उत्पादों की अनुमानित कीमत करीब 20 हजार रुपये बताई गई है। विभाग ने घी, दूध और पनीर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं तथा बिना लाइसेंस खाद्य निर्माण इकाई संचालित करने के मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

मिलावटी दूध और पनीर से बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का खतरा

डिप्टी सीएमओ डॉ. नंदन सिंह ने बताया कि दूध और पनीर का उपयोग लगभग हर घर में किया जाता है। ऐसे में मिलावटी और निम्न गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे पेट में अल्सर, अपच, जलन और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों के सेवन से किडनी और लिवर की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

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