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कृति सेनन की को-स्टार ने छोड़ी एक्टिंग, प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेकर बनीं साध्वी; बोलीं- ‘सब कुछ था, शांति नहीं थी’

फिल्म और ग्लैमर की दुनिया में नाम कमाने के बाद उसे छोड़ देना आसान नहीं होता। जहां कई कलाकार शोहरत और सफलता के बावजूद इंडस्ट्री से दूरी नहीं बना पाते, वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो जीवन में आध्यात्मिक शांति की तलाश में नया रास्ता चुन लेते हैं। इसी कड़ी में अभिनेत्री और मॉडल प्रणवी तिवारी का नाम चर्चा में है, जिन्होंने अभिनय करियर को अलविदा कहकर वृंदावन में आध्यात्मिक जीवन अपना लिया है।

शोबिज से आध्यात्मिकता तक का सफर

प्रणवी तिवारी ने हाल ही में अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के विचारों ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, जिसके बाद उन्होंने अभिनय और ग्लैमर की दुनिया से दूरी बनाने का फैसला किया। प्रणवी ने बताया कि एक समय उनके पास अच्छा करियर, आर्थिक स्थिरता और परिवार का साथ सब कुछ था, लेकिन भीतर एक अजीब खालीपन और बेचैनी बनी रहती थी। बाहरी सफलता के बावजूद उन्हें मानसिक शांति नहीं मिल रही थी।

एयर होस्टेस से अभिनेत्री बनीं प्रणवी

प्रणवी तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत एयर होस्टेस के रूप में की थी। बाद में उन्होंने मॉडलिंग और विज्ञापन जगत में कदम रखा। वह बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के साथ एक विज्ञापन में भी नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य विज्ञापनों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। हालांकि, करियर में आगे बढ़ने के बावजूद उनके मन की बेचैनी खत्म नहीं हुई। इसी वजह से उन्होंने जीवन के उद्देश्य को नए सिरे से तलाशना शुरू किया।

‘मेरे पास सब कुछ था, लेकिन शांति नहीं’

‘मेरो वृंदावन’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान प्रणवी ने कहा कि वह पहली बार वर्ष 2025 में वृंदावन गई थीं। उस समय वह अभिनय में पूरी तरह करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन भीतर से संतुष्ट नहीं थीं। उन्होंने कहा, “मेरे पास काम था, पैसा था और परिवार भी था, लेकिन मन में शांति नहीं थी। मुझे हमेशा महसूस होता था कि जीवन में कुछ महत्वपूर्ण कमी है।”

प्रेमानंद महाराज से मिली नई दिशा

प्रणवी के अनुसार, फरवरी 2025 में उन्होंने प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनना शुरू किया। उनके विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया। परिवार से चर्चा करने के बाद उन्होंने वृंदावन जाने का निर्णय लिया। वृंदावन में उनकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई जिन्होंने उन्हें प्रेमानंद महाराज से मिलने और दीक्षा प्राप्त करने में सहायता की। प्रणवी का कहना है कि गुरु के सान्निध्य में आने के बाद उन्हें वह शांति मिली जिसकी तलाश वह लंबे समय से कर रही थीं।

अब कृष्ण भक्ति में समर्पित जीवन

मई 2026 में प्रणवी स्थायी रूप से वृंदावन चली गईं। दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नया आध्यात्मिक जीवन शुरू किया और अब ‘भगवती’ के रूप में जानी जाती हैं। वर्तमान में वह कृष्ण भक्ति, नाम-जप और आध्यात्मिक साधना में अपना समय समर्पित कर रही हैं। प्रणवी तिवारी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है, जो भौतिक सफलता के बावजूद आंतरिक शांति की तलाश में रहते हैं। उनका मानना है कि सच्ची संतुष्टि बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और ईश्वर के प्रति समर्पण से प्राप्त होती है।

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