बच्चों की बीमारी के उपचार के लिए आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर उस समय विवादों में घिर गया, जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिविर में बच्चों को एक्सपायरी दवाएं वितरित की जा रही थीं। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों ने संबंधित फाउंडेशन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, UNM फाउंडेशन द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के लिए एक मेडिकल कैंप लगाया गया था। शिविर के दौरान ग्रामीणों की नजर दवाओं की एक्सपायरी डेट पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने दवाओं की जांच की। आरोप है कि कई दवाएं निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी वितरित की जा रही थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सतर्कता के कारण एक बड़ी घटना टल गई। मामले से नाराज लोगों ने फाउंडेशन की टीम को रोक लिया और उन्हें थाने ले जाकर शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही बरती गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया। अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि शिकायत की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इधर, क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि यदि एक्सपायरी दवा वितरण की पुष्टि होती है तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


