वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में एक बड़ा और विवादास्पद मोड़ सामने आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने आधिकारिक रूप से World Health Organization (WHO) से अपनी सदस्यता समाप्त करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले की पुष्टि अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग और विदेश विभाग ने संयुक्त बयान जारी कर की। घोषणा के तुरंत बाद जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी ध्वज हटा लिया गया, जिसे अमेरिका-WHO के दशकों पुराने रिश्ते के प्रतीकात्मक अंत के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अब केवल सीमित प्रशासनिक समन्वय के लिए WHO के संपर्क में रहेगा, ताकि बाहर निकलने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके।
WHO से दोबारा जुड़ने की कोई योजना नहीं
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, देश न तो WHO की पूर्ण सदस्यता में लौटने की योजना बना रहा है और न ही पर्यवेक्षक (Observer) की भूमिका निभाने का इरादा रखता है। इसके बजाय अमेरिका अब महामारी निगरानी, संक्रामक रोग नियंत्रण और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों पर देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देगा। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला WHO के प्रति भरोसे में आई गिरावट को दर्शाता है। अमेरिका लंबे समय से संगठन पर कोविड-19 महामारी के दौरान कमजोर नेतृत्व, पारदर्शिता की कमी और सुधारों को लागू न करने के आरोप लगाता रहा है।
ट्रंप प्रशासन की नीति का विस्तार
यह निर्णय पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की उस नीति की निरंतरता माना जा रहा है, जिसके तहत उनके दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन WHO से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अमेरिकी कानून के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की किसी भी एजेंसी से औपचारिक रूप से अलग होने के लिए एक वर्ष का नोटिस देना आवश्यक होता है, जिसे अब पूरा माना जा रहा है।
बकाया राशि को लेकर टकराव
इस फैसले के साथ एक नया वित्तीय विवाद भी खड़ा हो गया है। WHO का दावा है कि अमेरिका पर वर्ष 2024 और 2025 की सदस्यता फीस के रूप में लगभग 260 मिलियन डॉलर बकाया हैं। संगठन के प्रवक्ता का कहना है कि बकाया भुगतान के बिना पूर्ण अलगाव संभव नहीं है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन इस दावे से असहमत है। उनका तर्क है कि WHO को दी जाने वाली फंडिंग पहले ही रोक दी गई थी और बकाया भुगतान को बाहर निकलने की शर्त नहीं माना जा सकता।
वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर चिंता
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों ने इस फैसले को वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग के लिए झटका बताया है। Georgetown University के वैश्विक स्वास्थ्य कानून विशेषज्ञ Lawrence Gostin ने इसे अमेरिकी कानून और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के खिलाफ बताया।


