जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम बनेगा देश का पहला ‘स्पोर्ट्स सिटी’, भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी के लिए दावेदारी की
नई दिल्ली: युवा मामले एवं खेल मंत्रालय (MYAS) ने राजधानी के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN) को एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए ऑस्ट्रेलिया और क़तर के खेल बुनियादी ढाँचे को मॉडल के रूप में अपनाया जाएगा। मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में इन दोनों देशों का दौरा किया था ताकि उनके सफल खेल शहरों के ढांचे और प्रबंधन से सीख ली जा सके।

भारत ने इसी क्रम में लंदन स्थित राष्ट्रमंडल खेल मूल्यांकन समिति के समक्ष 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी के लिए अपना औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इस बोली प्रक्रिया की निगरानी भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा के नेतृत्व में की जा रही है। IOA ने अक्टूबर 2024 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) को एक आशय पत्र (Letter of Intent) भी सौंपा था, जो भारत की वैश्विक खेल आयोजनों में बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।
1982 के 9वें एशियाई खेलों के लिए निर्मित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था। वर्तमान में इसका रखरखाव भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा युवा मामले और खेल मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है।
यह स्टेडियम हाल ही में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (WPAC 2025) के दौरान फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। इस प्रतियोगिता में 100 से अधिक देशों के 2,200 खिलाड़ियों ने भाग लिया और 186 पदक स्पर्धाएँ हुईं। भारत ने इस ऐतिहासिक आयोजन में 6 स्वर्ण, 9 रजत और 7 कांस्य सहित कुल 22 पदक हासिल किए — जो देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का कहना है कि WPAC 2025 की सफल मेज़बानी ने भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन क्षमता को “एक नए स्तर” पर पहुँचा दिया है। इससे पहले, 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा एथलेटिक्स को पहली बार पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन इस वर्ष के आयोजन ने भारत को “ग्लोबल स्पोर्ट्स होस्ट” के रूप में एक नई पहचान दी है।


