44.8 C
Agra
Homeदेश"शादी नहीं हुई तो धोखा नहीं मान सकते" — सुप्रीम कोर्ट का...

“शादी नहीं हुई तो धोखा नहीं मान सकते” — सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश

नई दिल्ली: बदलते सामाजिक रिश्तों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि दो बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने संबंध किसी के चरित्र का प्रमाण नहीं होते। अदालत ने साफ किया कि हर रिश्ता शादी तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है और केवल शादी न होने से किसी पर धोखाधड़ी का ठप्पा नहीं लगाया जा सकता।

मामला तेलंगाना के एक पुलिस कांस्टेबल अभ्यर्थी से जुड़ा था, जिसकी भर्ती एक पुराने आपराधिक केस के आधार पर रद्द कर दी गई थी। यह केस पड़ोस में रहने वाली महिला के साथ संबंधों को लेकर दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में आपसी समझौते से समाप्त हो गया।

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि आधुनिक समाज की वास्तविकताओं को स्वीकार करना जरूरी है। अदालत ने माना कि लंबे समय तक चले रिश्तों को सामान्य रूप से सहमति आधारित संबंध माना जाएगा और ऐसे मामलों में केवल अनुमान के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

कोर्ट ने नियोक्ताओं को भी संदेश दिया कि समझौते से खत्म हुए मामलों को दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता। यदि शिकायतकर्ता स्वयं मामला आगे नहीं बढ़ाना चाहती, तो विभाग या समाज को अपने स्तर पर निष्कर्ष निकालने का अधिकार नहीं है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments