ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला— वीजा आवेदकों पर शिकंजा और कस गया
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई इमीग्रेशन नीति का असर वैश्विक स्तर पर वीजा आवेदकों पर दिखने लगा है। जनवरी 2025 से अब तक अमेरिकी प्रशासन द्वारा 85,000 से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं। इस बीच अब एच-1बी वीजा की जांच प्रक्रिया को और कड़ा बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट को सार्वजनिक करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इस फैसले का सीधा असर भारत के टेक प्रोफेशनल्स और अन्य विदेशी कामगारों पर पड़ रहा है। कई भारतीय आवेदकों के वीजा इंटरव्यू अगले साल तक टाल दिए गए हैं, जिससे उनकी नौकरी जॉइनिंग और करियर योजनाएं अटक गई हैं।
अमेरिकी दूतावास की चेतावनी
अमेरिकी दूतावास ने वीजा आवेदकों को आगाह करते हुए कहा है कि अगर किसी को अपॉइंटमेंट रद्द होने का ईमेल मिला है, तो वह निर्धारित तिथि पर दूतावास न पहुंचे, क्योंकि उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूतावास ने साफ किया है कि नए अपॉइंटमेंट की तारीख बाद में जारी की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर में प्रस्तावित कई इंटरव्यू अब मार्च 2025 तक शिफ्ट कर दिए गए हैं, हालांकि आधिकारिक रूप से रद्द अपॉइंटमेंट की संख्या का खुलासा नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया जांच होगी अनिवार्य
इमीग्रेशन कानून विशेषज्ञ स्टीवन ब्राउन के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की गहन जांच की योजना बना रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवेदक की ऑनलाइन गतिविधि अमेरिका की सुरक्षा या सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा न बने।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हर वीजा निर्णय को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा जाता है, इसलिए जांच प्रक्रिया में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
एच-1बी नीति और कड़ी
एच-1बी वीजा को लेकर प्रशासन पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। सितंबर में ट्रंप सरकार ने नए एच-1बी वीजा पर लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) का एकमुश्त शुल्क लागू किया था। इसके अलावा, कुछ देशों से आने वाले आवेदकों के ग्रीन कार्ड, नागरिकता और अन्य इमीग्रेशन प्रक्रियाओं पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह फैसला नेशनल गार्ड सैनिकों पर हमले की घटना के बाद लिया गया।
85,000 से ज्यादा वीजा रद्द – विदेश मंत्रालय का खुलासा
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जनवरी 2025 से अब तक 85,000 से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं, जिनमें 8,000 से ज्यादा छात्र वीजा शामिल हैं।
शराब पीकर गाड़ी चलाने (DUI), चोरी और हमला जैसे आपराधिक मामलों को वीजा रद्द होने की बड़ी वजह बताया गया है। पिछले एक साल में करीब आधे वीजा इन्हीं अपराधों के चलते रद्द किए गए। हालांकि बाकी रद्दीकरणों पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
विवादित मामलों में भी कार्रवाई
ट्रंप प्रशासन ने कुछ राजनीतिक और संवेदनशील मामलों में भी वीजा रद्द करने से पीछे नहीं हटने का संकेत दिया है। कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की हत्या पर कथित खुशी मनाने वालों के वीजा अक्टूबर में रद्द कर दिए गए थे। इसके अलावा, गाजा युद्ध के खिलाफ छात्र प्रदर्शनों में शामिल विदेशी छात्रों को भी कड़ी जांच का सामना करना पड़ा।
वीजा धारकों पर लगातार नजर
अमेरिकी विदेश विभाग ने अगस्त में घोषणा की थी कि अब 5.5 करोड़ से ज्यादा वीजा धारकों की “कंटीन्युअस मॉनिटरिंग” की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि सिर्फ वीजा मिलने तक ही नहीं, बल्कि अमेरिका में रहने के दौरान भी व्यक्ति की गतिविधियों, ऑनलाइन व्यवहार और पृष्ठभूमि की लगातार समीक्षा होगी।


