बडगाम: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके संभावित लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। कवान जंगल क्षेत्र में पालमैदान के पास तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को दवाइयों और खाने-पीने की चीजों से भरा एक बैग बरामद हुआ है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह सामान जंगल में किसके लिए पहुंचाया गया था और इसे वहां तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही। हाशिम मूसा को 29 सितंबर 2026 को बडगाम के यूसमर्ग-कवान क्षेत्र में सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान के दौरान मार गिराया गया था। उसके बाद तलाशी अभियान में उसका शव और युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई थी।
जंगल में मिला सामान, सपोर्ट नेटवर्क पर शक
पुलिस के मुताबिक, पालमैदान के पास मिले बैग में दवाइयों और खाने की सामग्री थी। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह खेप कब जंगल में पहुंचाई गई और इसे किस व्यक्ति या समूह के लिए रखा गया था। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या इस तरह की सामग्री लंबे समय से जंगलों में छिपे आतंकियों तक पहुंचाई जा रही थी। अगर ऐसा कोई नेटवर्क सामने आता है तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसके स्थानीय संपर्कों और मददगारों की पहचान करना महत्वपूर्ण होगा।
पीर पंजाल से कश्मीर घाटी तक नेटवर्क की जांच
सुरक्षा एजेंसियां हाशिम मूसा की गतिविधियों और उसके संपर्कों के उन पहलुओं की भी जांच कर रही हैं, जिनका संबंध पीर पंजाल क्षेत्र और कश्मीर घाटी से बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मूसा 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा और पुंछ-राजौरी बेल्ट से लेकर कश्मीर घाटी तक उसकी गतिविधियों की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में जंगलों में भोजन, दवाइयां और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने वाले संभावित नेटवर्क की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
हाशिम मूसा के बाद जांच का फोकस स्थानीय मददगारों पर
सुरक्षा एजेंसियां अब सिर्फ जंगल में मौजूद आतंकियों की तलाश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके संभावित स्थानीय संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या किसी ओवरग्राउंड वर्कर, स्थानीय सहयोगी या अन्य व्यक्ति ने आतंकियों तक जरूरी सामान पहुंचाने में मदद की थी। हालांकि, बरामद बैग को किस व्यक्ति ने वहां पहुंचाया था, इस बारे में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
29 सितंबर को हुआ था हाशिम मूसा का एनकाउंटर
29 सितंबर की रात बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त अभियान शुरू किया था। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। मूसा की पहचान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के तौर पर सामने आई थी। वह चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सक्रिय सदस्य बताया गया था। उसके पहले इस समूह के अन्य सदस्यों को अलग-अलग अभियानों में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था।
पहलगाम हमले से भी जुड़ा था नाम
हाशिम मूसा का नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी सामने आया था। कई रिपोर्टों में उसे इस हमले का प्रमुख संदिग्ध बताया गया। उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इनाम भी घोषित किया था। अब उसके मारे जाने के बाद जांच एजेंसियों की नजर उन संपर्कों पर है, जो उसके जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक सक्रिय रहने के दौरान उसे रहने, खाने और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकते थे।
FIR दर्ज, आगे की जांच जारी
बरामदगी से जुड़े मामले में खानसाहिब पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 181/2026 के तहत जांच किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां बरामद सामान के स्रोत, उसकी डिलीवरी और संभावित सपोर्ट नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाने पर है कि जंगलों में छिपे आतंकियों तक लॉजिस्टिक सपोर्ट किस माध्यम से पहुंच रहा था। जांच में सामने आने वाले सुराग स्थानीय सहयोगियों और आतंकियों के बीच संभावित संपर्क की तस्वीर साफ कर सकते हैं।


