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आरव हत्याकांड में बड़ा फैसला, विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा

भाभी से शादी नहीं हुई तो मासूम को मार डाला, आरव हत्याकांड में आरोपी को फांसी

  • CCTV बना सबसे बड़ा गवाह, डेढ़ साल के आरव के हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई फांसी
  • फिरोजाबाद के चर्चित आरव हत्याकांड में बड़ा फैसला, विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा

फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी का अपराध मानते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी अदालत में भावुक होकर रोने लगा। पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच उसे जेल से दोपहर करीब ढाई बजे कोर्ट लेकर पहुंची थी। फैसला सुनाए जाने के बाद पुलिस आरोपी को वापस जेल ले गई। वहीं, मासूम आरव की नानी पिंकी देवी ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है।

30 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात

यह सनसनीखेज घटना 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। आरोप है कि विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने अपनी रिश्ते की भाभी रति देवी पर शादी का दबाव बनाया था। जब रति ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो उसने बदला लेने के लिए उसके डेढ़ साल के बेटे आरव को निशाना बनाया। आरोपी मासूम को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर घर से करीब 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर ले गया। वहां उसने महज 27 सेकंड के भीतर बच्चे को आठ बार पक्की सड़क पर पटक दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी शव को घर के बाहर फेंककर फरार हो गया। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसने मामले को मजबूत साक्ष्य प्रदान किया।

मुठभेड़ के बाद हुई थी गिरफ्तारी

घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। देर रात पुलिस मुठभेड़ के दौरान विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को गिरफ्तार कर लिया गया। मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। बाद में पुलिस ने हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की।

क्या था पूरा विवाद?

मूल रूप से अरांव क्षेत्र की रहने वाली रति देवी की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते रति पिछले करीब पांच महीने से मायके में रह रही थीं। इसी दौरान सुमित के फुफेरे भाई विराज ने रति के करीब आने की कोशिश की और शादी का प्रस्ताव रखा। रति द्वारा लगातार इनकार किए जाने के बाद आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

अदालत ने माना जघन्य अपराध

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मासूम बच्चे की बेहद क्रूर तरीके से हत्या समाज को झकझोर देने वाला अपराध है। अभियोजन पक्ष के मजबूत साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित हुआ। इसी आधार पर अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई।

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