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एटा में जमीन विवाद ने ली बुजुर्ग की जान: सवा बीघा भूमि को लेकर खूनी संघर्ष, 70 वर्षीय वृद्ध की मौत, कई घायल

एटा, उत्तर प्रदेश। जलेसर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में सवा बीघा जमीन के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दबंगों द्वारा किए गए कथित जानलेवा हमले में 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि दो युवतियों समेत परिवार के छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।

रजिस्ट्री को लेकर बढ़ा विवाद

मृतक अमर सिंह (70) पुत्र बीरी सिंह लंबे समय से दिल्ली में रह रहे थे। गांव में उनकी पैतृक सवा बीघा जमीन थी। बताया जा रहा है कि जनवरी 2025 में उन्होंने यह जमीन अपने भतीजों को देने के बजाय गांव के ही महेश पाल सिंह और भगवान सिंह पुत्रगण पीताम्बर सिंह के नाम रजिस्ट्री कर दी थी। इसी बात से नाराज उनके भतीजे पुष्पेंद्र, दिनेश, प्रेमवीर और हेमंत कथित रूप से जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे।

पहले मारपीट, फिर अगले दिन हमला

पीड़ित पक्ष के अनुसार, 21 जून को आरोपियों ने अमर सिंह के साथ मारपीट की और उनके मकान में तोड़फोड़ की। बीच-बचाव करने पहुंचे महेश पाल सिंह के साथ भी मारपीट की गई। घटना के बाद पीड़ितों ने कोतवाली में लिखित शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की थी। आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन तो दिया, लेकिन गांव में कोई पुलिस बल नहीं भेजा गया।

सुबह-सुबह परिवार पर बोला हमला

परिजनों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता से आरोपियों के हौसले बढ़ गए और अगले ही दिन उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से महेश पाल सिंह के परिवार पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला करते हुए जमकर पथराव किया। इस दौरान घर के बाहर खड़ी ईको कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

छह लोग घायल, बुजुर्ग ने रास्ते में तोड़ा दम

हमले में कीर्ति, वैष्णवी, वंशिका, दीपक, महेश पाल सिंह और भगवान सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं अमर सिंह को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलेसर ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने अमर सिंह को गंभीर हालत में आगरा रेफर कर दिया। आगरा ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। उनका कहना है कि यदि 21 जून को ही गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया जाता, तो यह हत्या और खूनी संघर्ष रोका जा सकता था।

जांच और गिरफ्तारी में जुटी पुलिस

घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घायलों का इलाज जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

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