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FATF में भारत की बड़ी जीत: विवेक अग्रवाल बने उपाध्यक्ष, वैश्विक वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगा देश का प्रभाव

नई दिल्ली: भारत के लिए वैश्विक स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों की निगरानी करने वाली संस्था Financial Action Task Force (FATF) ने भारत के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी Vivek Agrawal को वर्ष 2026-27 के लिए अपना उपाध्यक्ष (Vice President) नियुक्त किया है। वह 1 जुलाई 2026 से अपना कार्यभार संभालेंगे और वर्तमान उपाध्यक्ष Giles Thomson का स्थान लेंगे।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव हैं विवेक अग्रवाल

विवेक अग्रवाल वर्तमान में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वह 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर से जुड़े रहे हैं। इससे पहले भी वह FATF में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं और वैश्विक वित्तीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रख चुके हैं। अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ भारत द्वारा किए गए सामूहिक प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने इस नई जिम्मेदारी को लेकर उत्साह व्यक्त किया और वैश्विक स्तर पर FATF के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

FATF में उपाध्यक्ष पद क्यों है इतना अहम?

FATF की प्लेनरी बैठक में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से विवेक अग्रवाल को उपाध्यक्ष चुना। इस भूमिका में वह FATF अध्यक्ष के साथ मिलकर संगठन की रणनीतियों, नीतियों और वैश्विक अभियानों का संचालन करेंगे। वर्ष 1989 में जी-7 देशों द्वारा स्थापित FATF का मुख्यालय Paris में स्थित है। यह संस्था दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद की फंडिंग और अन्य वित्तीय अपराधों पर निगरानी रखती है। FATF विभिन्न देशों के लिए वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा संबंधी मानक तय करती है तथा समय-समय पर उनके अनुपालन की समीक्षा भी करती है। वर्तमान में FATF नेटवर्क से 200 से अधिक देश और क्षेत्र जुड़े हुए हैं।

वैश्विक मंच पर मजबूत हो रही भारत की साख

विशेषज्ञों का मानना है कि FATF में भारत के प्रतिनिधि का उपाध्यक्ष चुना जाना देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ अपने कानूनी एवं तकनीकी ढांचे को मजबूत किया है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान, फिनटेक नवाचार और वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VASPs) जैसे उभरते क्षेत्रों में भी भारत ने FATF की नीतिगत चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि भारत को वैश्विक वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?

  • FATF में भारत की रणनीतिक भूमिका और मजबूत होगी।
  • वैश्विक वित्तीय अपराधों के खिलाफ नीतियां बनाने में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक महत्व मिलेगा।
  • यह नियुक्ति वैश्विक संस्थाओं में भारत के बढ़ते प्रभाव और विश्वसनीयता का प्रमाण मानी जा रही है।
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