15.8 C
Agra
Homeउद्योग जगतRERA पर सवाल: 75% राज्यों में वार्षिक रिपोर्ट नहीं, होम बायर्स संगठन...

RERA पर सवाल: 75% राज्यों में वार्षिक रिपोर्ट नहीं, होम बायर्स संगठन का बड़ा आरोप

देशभर के होम बायर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने शुक्रवार को रियल एस्टेट नियामक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का दावा है कि अधिकांश राज्यों में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) अपने कानूनी दायित्वों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे रेरा कानून की मूल भावना ही कमजोर पड़ती जा रही है। एफपीसीई के अनुसार, रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 78 के तहत सभी रेरा प्राधिकरणों को हर साल अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करनी होती है, लेकिन देश के 75 प्रतिशत से अधिक राज्यों में या तो ये रिपोर्ट कभी जारी ही नहीं की गईं, या फिर लंबे समय से अपडेट नहीं की गई हैं। संगठन ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से मांग की है कि वह सभी राज्यों को निर्धारित प्रारूप में समय पर वार्षिक रिपोर्ट जारी करने के लिए नए सिरे से निर्देश दे।

संगठन ने यह भी आग्रह किया कि मंत्रालय राज्यों को अधिनियम की धारा 82 और 83 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए कहे। एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय का कहना है कि जब तक ठोस आंकड़े यह साबित नहीं कर देते कि रेरा लागू होने के बाद घरों के कब्जे में सुधार हुआ है और सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बना है, तब तक इसकी सफलता के दावे निराधार हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्दोष घर खरीदारों को अब रेरा के नाम पर ही गुमराह किया जा रहा है। बिल्डरों के लिए यह कानून एक तरह का ढाल बन गया है, जिसके पीछे छिपकर वे बिना जवाबदेही के परियोजनाएं बेच रहे हैं। एफपीसीई ने बताया कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों ने रेरा लागू होने के बाद से अब तक एक भी वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। वहीं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना सहित नौ राज्यों ने पहले कुछ समय तक रिपोर्ट जारी की, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया भी बंद कर दी गई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments