सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मशहूर आईटीसी मौर्या होटल को निर्देश दिया है कि वह आशना रॉय नाम की महिला को 25 लाख रुपये का मुआवजा दे। यह मामला वर्ष 2018 का है, जब आशना ने होटल के सैलून से हेयरकट कराया था, लेकिन कटिंग उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुई। इसी को लेकर उन्होंने पहले होटल से करोड़ों रुपये के हर्जाने की मांग की थी। दरअसल, आशना ने शुरुआत में इस मामले को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के सामने रखा था। जुलाई 2018 में आयोग ने होटल को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ होटल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सेवा में कमी से जुड़े निष्कर्ष में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन मुआवजे की रकम पर सवाल उठाते हुए NCDRC से दोबारा विचार करने को कहा। कोर्ट का कहना था कि इतने बड़े दावे को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं हैं। मामला दोबारा NCDRC पहुंचने पर आशना ने अपनी मुआवजे की मांग बढ़ाकर 5.2 करोड़ रुपये कर दी। इसके बावजूद आयोग ने फिर से होटल को 2 करोड़ रुपये मुआवजा और शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया।
इस फैसले के खिलाफ होटल ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने महिला के दावों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा करने के लिए मजबूत और भरोसेमंद सबूत जरूरी होते हैं, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमान या व्यक्तिगत आकलन के आधार पर इतना बड़ा हर्जाना तय नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के आदेश में संशोधन करते हुए मुआवजे की राशि घटाकर 25 लाख रुपये कर दी।


