झूठी गवाही के आरोपों पर हाईकोर्ट ने रानी कपूर से मांगा जवाब
दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे प्रिया कपूर बनाम रानी कपूर विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है। अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाते हुए रानी कपूर को नोटिस जारी किया है और उन्हें प्रिया कपूर द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनना आवश्यक है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने प्रिया कपूर के एक आवेदन पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत झूठी गवाही देने के आरोप में रानी कपूर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में दावा किया गया है कि उपलब्ध हलफनामों और तस्वीरों जैसे साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि रानी कपूर ने शपथपत्र में जानबूझकर गलत बयान दिया था कि उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट डीड’ पर न तो हस्ताक्षर किए थे और न ही उसकी शर्तों को पढ़ा था।
इसके अलावा, अदालत ने प्रिया कपूर की उस याचिका पर भी रानी कपूर को नोटिस भेजा है, जिसमें मुकदमे को सामग्री छिपाने और प्रक्रिया के दुरुपयोग के आधार पर खारिज करने का आग्रह किया गया है। प्रिया कपूर का आरोप है कि वादी द्वारा की गई कार्रवाइयाँ अदालत के साथ धोखाधड़ी के समान हैं। दूसरी ओर, रानी कपूर ने अपनी पुत्रवधू प्रिया कपूर और अन्य के विरुद्ध दायर मुकदमे में कथित पारिवारिक ट्रस्ट को “अमान्य” घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर बनाए गए ट्रस्ट के लिए जाली और धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों का उपयोग किया गया। रानी कपूर ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि प्रतिवादियों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के संचालन या समर्थन से स्थायी रूप से रोका जाए।
अपनी याचिका में रानी कपूर ने कहा है कि वे अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की संपूर्ण संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं और उनकी जानकारी के बिना उस संपत्ति को ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है। सुरिंदर कपूर, ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ सहित कई व्यावसायिक उपक्रमों के प्रवर्तक रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके बेटे संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में कभी यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी माँ को उनकी संपत्तियों और अधिकारों से वंचित कर दिया गया है, न ही उन्हें कथित ट्रस्ट की प्रति दी गई।
याचिका के अनुसार, प्रतिवादी पक्ष ने संजय कपूर के साथ मिलीभगत कर अवैध लेन-देन के जरिये रानी कपूर की संपत्तियाँ एक कथित धोखाधड़ी वाले ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दीं। गौरतलब है कि इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान बेहोश होने के बाद 12 जून को संजय कपूर का निधन हो गया था, और बताया गया कि उन्हें हृदयाघात हुआ था। इस विवाद से जुड़ा एक और मामला भी उच्च न्यायालय में लंबित है, जिसमें करिश्मा कपूर के दो बच्चों ने अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की वैधता को चुनौती दी है। बच्चों ने प्रिया कपूर पर लालच से प्रेरित होने का आरोप लगाया है। इस पूरे प्रकरण में अगली सुनवाई मार्च में निर्धारित है।


