वॉशिंगटन: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय Pentagon ने एक अहम और विवादास्पद कदम उठाते हुए Harvard University के साथ अपने सभी औपचारिक रिश्ते खत्म करने का फैसला किया है। रक्षा विभाग ने साफ किया है कि अब हार्वर्ड के साथ चल रहे सैन्य प्रशिक्षण, फेलोशिप और सर्टिफिकेट से जुड़े सभी कार्यक्रम बंद कर दिए जाएंगे। इस फैसले के पीछे पेंटागन का कहना है कि विश्वविद्यालय का मौजूदा माहौल अमेरिकी सेना की जरूरतों और मूल्यों से मेल नहीं खाता। रक्षा सचिव Pete Hegseth ने बयान में कहा कि हार्वर्ड अब ऐसे अधिकारियों को तैयार नहीं कर पा रहा, जो देश की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सोच और नेतृत्व दे सकें।
कट्टरपंथ और यहूदी-विरोधी भावनाओं का आरोप
पेंटागन के अनुसार, हार्वर्ड परिसर में बढ़ती कट्टरपंथी और यहूदी-विरोधी विचारधाराओं को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। विभाग का मानना है कि इस तरह का वातावरण सेना के अधिकारियों की पेशेवर सोच को प्रभावित कर सकता है। हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हार्वर्ड “वोक संस्कृति” की ओर झुक गया है, जबकि रक्षा विभाग का मकसद युद्धक क्षमता और अनुशासन को मजबूत करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से किसी नए सैन्य अधिकारी को हार्वर्ड के कार्यक्रमों में नहीं भेजा जाएगा, हालांकि जो अधिकारी अभी पढ़ाई कर रहे हैं, वे अपना कोर्स पूरा कर सकेंगे।
पहले से निशाने पर था हार्वर्ड
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पहले से ही राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के निशाने पर रही है। White House का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में यहूदी-विरोधी पूर्वाग्रह को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड की अरबों डॉलर की संघीय रिसर्च फंडिंग में कटौती की और विदेशी छात्रों के नामांकन पर भी सख्ती की कोशिश की।


