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रूस से तेल आयात पर भारत का स्टैंड स्पष्ट, बाहरी दबाव में नहीं बदलेगी नीति

MEA का बयान: भारत की ऊर्जा नीति स्वतंत्र और संतुलित रहेगी

भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश की ऊर्जा नीति का केंद्र बिंदु केवल और केवल अपने नागरिकों की जरूरतें हैं। सरकार के मुताबिक, वैश्विक हालात चाहे जैसे भी हों, 1.4 अरब लोगों के लिए सस्ती और निर्बाध ऊर्जा उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी बनी रहेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रतिनिधि रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत अपने हितों को प्राथमिकता देगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है।

ऊर्जा स्रोतों में विविधता पर जोर

प्रवक्ता ने कहा कि सरकार लगातार अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में काम कर रही है ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप भारत अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदने की संभावनाएं तलाश रहा है।

वेनेजुएला के साथ पुराने रिश्ते

रणधीर जायसवाल ने बताया कि वेनेजुएला लंबे समय से भारत का ऊर्जा क्षेत्र में साझेदार रहा है। कुछ वर्षों के अंतराल के बाद भारत ने 2023-24 में वहां से तेल आयात दोबारा शुरू किया था, लेकिन बाद में प्रतिबंधों के कारण इसे रोकना पड़ा। भारत भविष्य में भी व्यावसायिक दृष्टि से फायदेमंद अवसरों पर विचार करने को तैयार है।

रूस बना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है और कुल आयात में उसका हिस्सा करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे पहले भारत मुख्य रूप से सऊदी अरब और इराक जैसे मध्य पूर्वी देशों से तेल मंगाता था।

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