उत्तर प्रदेश के आगरा में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। यह हड़ताल सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण तथा सहकारी बैंकों में पूरी तरह लागू रही, जिससे बैंकिंग सेवाएं बाधित रहीं। हड़ताल के तहत बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने संजय प्लेस स्थित एलआईसी भवन पर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में मौजूद बैंककर्मियों ने एकजुट होकर पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को बुलंद किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आईबॉक के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित सहगल ने बताया कि यह आंदोलन बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया गया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए, सभी शनिवारों को अवकाश घोषित हो और कर्मचारियों पर बढ़ते कार्य दबाव को कम किया जाए। यूएफबीयू आगरा के संचालक गजेंद्र सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक बैंकों को कमजोर कर उनके जनहितकारी स्वरूप को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता से भी इसके विरोध में एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2015 में हुए द्विपक्षीय समझौतों और 7 दिसंबर 2023 के समझौते में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की सिफारिश की जा चुकी है। वर्तमान में बैंक केवल दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि आईबीए से हुए समझौते के अनुसार सभी शनिवारों को अवकाश तय किया गया था। बावजूद इसके, सरकार की ओर से अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन आम जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव और उपेक्षा के विरोध में है। यूनियनों ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए असुविधा के लिए खेद भी जताया। प्रदर्शन के दौरान पंकज शर्मा, शैलेन्द्र झा और होशियार सिंह सहित कई वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।


