दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतें करीब, भारत–EU FTA से बदलेगा ग्लोबल ट्रेड
नई दिल्ली | भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों ने एक बड़ा ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर राजनीतिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि “दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच निर्णायक साझेदारी” बताया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेताओं की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी ने पहले ही इस रिश्ते को ऐतिहासिक बना दिया था, और अब यह समझौता उस रिश्ते को नई दिशा देगा।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बना भारत–EU FTA
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। संयोगवश, 27 तारीख को ही यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों के साथ यह समझौता संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि इससे:
- भारतीय किसानों और MSME सेक्टर को यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी
- मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे
- दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई रफ्तार मिलेगी
- फिलहाल भारत और यूरोपीय संघ के बीच 180 बिलियन यूरो का व्यापार है और 8 लाख से ज्यादा भारतीय EU देशों में रहकर अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी मुहर
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि किसी भी रणनीतिक रिश्ते की बुनियाद सुरक्षा होती है। इसी सोच के तहत भारत और EU ने Security and Defence Partnership को औपचारिक रूप दिया है।
इससे:
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा
- रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के नए रास्ते खुलेंगे
एंटोनियो कोस्टा: ‘दुनिया को साफ संदेश’
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि ऐसे दौर में, जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है, भारत और यूरोपीय संघ भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में साथ खड़े हैं। उन्होंने इसे भारत और EU के बीच पहला व्यापक रक्षा और सुरक्षा समझौता बताते हुए कहा कि यह रणनीतिक विश्वास को एक नए स्तर तक ले जाएगा।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन: ताकतों का संगम
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह समझौता भारतीय कौशल, सेवाओं और बड़े पैमाने की क्षमता को यूरोपीय तकनीक, पूंजी और नवाचार से जोड़ता है।
उनके मुताबिक, इससे न सिर्फ आर्थिक विकास को बल मिलेगा, बल्कि उस दौर में रणनीतिक निर्भरता भी कम होगी जब व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।


