शंकराचार्य पदवी पर सवाल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी को लेकर अर्पणा यादव का पलटवार
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अर्पणा यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य पदवी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की परंपरा में चार पीठ मानी जाती हैं और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वास्तव में शंकराचार्य हैं या नहीं, इस संबंध में उनके पास कोई ठोस तथ्य नहीं है। अर्पणा यादव ने स्पष्ट किया कि इस विषय में जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है। प्रयागराज में हाल ही में हुई घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति या संस्था उससे ऊपर नहीं हो सकती। वहीं प्रतीक यादव से तलाक से जुड़े सवालों पर उन्होंने इसे निजी मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
धर्मशाला रोड स्थित एक प्रतिष्ठान के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचीं अर्पणा यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की उस टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर बयान दिया था। अर्पणा यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ पर इस तरह की टिप्पणी करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं एक गुरु हैं और सनातन परंपरा के संत होने के नाते उन्हें संयम रखना चाहिए।उन्होंने प्रयागराज में अव्यवस्था की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक या व्यक्तिगत छींटाकशी ठीक नहीं है। बाद में उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पदवी पर सीधा सवाल नहीं उठा रहीं, बल्कि केवल तथ्यों की स्पष्टता चाहती हैं।
अर्पणा यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों का बचाव करते हुए कहा कि वे राजधर्म का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं। मुरादाबाद में एक हिंदू युवती को बुरका पहनाए जाने के मामले पर उन्होंने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी और बावन के पूर्व ब्लॉक प्रमुख समीर सिंह भी मौजूद रहे।


