पश्चिम बंगाल में सामने आए 25,000 सहायक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती घोटाले ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, रिश्वत लेकर नियुक्ति पत्र जारी किए गए और तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से नियुक्तियां दी जाती रहीं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब तक 698 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त कर ली हैं। इनमें फ्लैट, विला और जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं, जो कथित तौर पर अवैध नियुक्तियों से अर्जित धन से खरीदे गए थे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
गत वर्ष 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी (सिविल) संख्या 9586/2024 – पश्चिम बंगाल राज्य बनाम बैशाखी भट्टाचार्य (चटर्जी) व अन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 25,000 से अधिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। अदालत ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को “दूषित और दागदार” करार दिया।
57.78 करोड़ की नई जब्ती
ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 57.78 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ये संपत्तियां टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा, बिचौलिए प्रसन्ना कुमार रॉय और अन्य आरोपियों से जुड़ी बताई जा रही हैं।
जब्त संपत्तियों में उत्तर 24 परगना के राजारहाट, न्यू टाउन, पाथरघाटा, गरगरी सहित मुर्शिदाबाद और पूर्वी बर्धमान के कई इलाके शामिल हैं। इनमें HIDCO द्वारा विकसित क्षेत्र भी शामिल बताए गए हैं।
कैसे हुआ घोटाला
जांच के मुताबिक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। आरोप है कि पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग (SSC) की भर्ती प्रक्रिया में ओएमआर शीट और इंटरव्यू अंकों में हेराफेरी की गई। अयोग्य उम्मीदवारों से मोटी रिश्वत लेकर पैनल की वैधता समाप्त होने के बाद भी नियुक्तियां दी गईं। ईडी का कहना है कि प्रसन्ना कुमार रॉय इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख बिचौलिए थे, जिन्होंने सहयोगियों के साथ मिलकर नकदी जुटाई और उसे कंपनियों, एलएलपी तथा बैंक खातों के जटिल जाल के जरिए घुमाया। बाद में इसी धन से अचल संपत्तियां खरीदी गईं।गिरफ्तारियां और खुलासे
जांच में यह भी सामने आया कि टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा अवैध वसूली और धन के लेन-देन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। मुर्शिदाबाद स्थित उनके आवास पर छापेमारी के दौरान भागने की कोशिश करने पर उन्हें 25 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया। उनके और परिजनों के नाम पर खरीदी गई लगभग 3.01 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अवैध आय से अर्जित बताई गई हैं। इसके अलावा, प्रसन्ना कुमार रॉय की करीबी सहयोगी/पूर्व पत्नी नीलिमा मंगल के नाम पर भी बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदे जाने के सबूत मिले हैं।
कुल मिलाकर कितनी जब्ती?
- ग्रुप C और D स्टाफ भर्ती घोटाला: 247.2 करोड़ रुपये
- SSC सहायक शिक्षक (कक्षा 9–12) भर्ती घोटाला: 238.78 करोड़ रुपये
- प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाला: लगभग 154 करोड़ रुपये
- इन सभी मामलों को मिलाकर ईडी कोलकाता द्वारा अब तक की कुल जब्ती 698 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।


