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मिडिल ईस्ट तनाव का यूपी पर असर, ईरान को होने वाला 1500 करोड़ का निर्यात खतरे में

वैश्विक तनाव की मार: ईरान संकट से यूपी के किसान-निर्यातक परेशान

मध्य पूर्व में गहराते तनाव और ईरान से जुड़ी वैश्विक अनिश्चितता का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था के जमीनी स्तर पर महसूस होने लगा है। इसका सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश को लग रहा है, जहां से ईरान के लिए बड़े पैमाने पर कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात होता है। मौजूदा हालात में यूपी से ईरान जाने वाला करीब 1500 करोड़ रुपये का व्यापार जोखिम में आ गया है।

ईरान संकट से निर्यात की रफ्तार थमी

ईरान में सुरक्षा हालात बिगड़ने और IRGC से जुड़े घटनाक्रम के बाद शिपमेंट पर असर साफ दिख रहा है। निर्यातकों के मुताबिक, कई खेपें या तो रास्ते में ही अन्य देशों के बंदरगाहों पर रोक दी गई हैं या फिर कांडला पोर्ट पर अटकी पड़ी हैं। भुगतान और डिलीवरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के चलते अब तक 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर रद्द हो चुके हैं।

चावल कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित

उत्तर प्रदेश से लंबे समय से ईरान को बासमती व गैर-बासमती चावल, फल-सब्जियां, दवाइयां, कपड़े, पशु आहार और इंजीनियरिंग उत्पाद भेजे जाते रहे हैं। लेकिन मौजूदा हालात में बासमती चावल का निर्यात सबसे ज्यादा दबाव में है।
मेरठ स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम के अधिकारियों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को लगभग 6400 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात किया था। पहले से लागू अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने व्यापार को सीमित किया हुआ था, अब नए प्रतिबंधों की आशंका से संकट और गहरा गया है।

यूपी के कई जिले संकट की जद में

निर्यात पर निर्भर जिलों—कानपुर, गाजियाबाद, सीतापुर, लखीमपुर और सिद्धार्थ नगर—में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय व्यापार संगठनों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर किसानों की आय और स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा।

सरकार से मदद की उम्मीद

निर्यातकों और कारोबारियों का मानना है कि लंबे समय तक स्थिति बिगड़ी रही तो किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में केंद्र सरकार से वैकल्पिक बाजारों की तलाश, बीमा कवर और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की मांग तेज हो गई है। ईरान से जुड़ा यह संकट एक बार फिर दिखाता है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव की हल्की सी आंच भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को गहरे झटके दे सकती है, खासकर तब जब किसी राज्य की बड़ी आबादी निर्यात आधारित कृषि पर निर्भर हो।

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