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ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिका की टैरिफ धमकी से यूरोप–वॉशिंगटन रिश्तों में बढ़ा तनाव

अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए गए सख्त रुख ने यूरोप और वॉशिंगटन के बीच पहले से ही नाजुक आर्थिक रिश्तों में नया तनाव पैदा कर दिया है। फ्रांस के वित्त मंत्री Roland Lescure ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की कोशिश की, तो इसका असर अमेरिका–यूरोपीय संघ व्यापार संबंधों पर गहराई से पड़ सकता है और जवाब में व्यापारिक टकराव (ट्रेड वॉर) तक की नौबत आ सकती है।

कूटनीति बेनतीजा, बयानबाज़ी तेज

बुधवार को अमेरिका, Denmark और Greenland के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत किसी ठोस सहमति के बिना समाप्त हो गई। इसके बाद लेस्क्योर ने दोहराया कि ग्रीनलैंड एक संप्रभु व्यवस्था के तहत आता है और यूरोपीय संघ से जुड़ा हुआ क्षेत्र है—जिसे किसी दबाव से अलग नहीं किया जा सकता।

टैरिफ बनाम जवाबी कदम

भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने डेनमार्क या यूरोप पर टैरिफ या आर्थिक दबाव बढ़ाया, तो यूरोपीय संघ भी समान प्रतिक्रिया दे सकता है। Dan Alamariu (मुख्य रणनीतिकार, Alpine Macro) के अनुसार ऐसी स्थिति वैश्विक बाजारों में अस्थिरता ला सकती है और NATO जैसे गठबंधनों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

ग्रीनलैंड में यूरोपीय मौजूदगी

तनाव के बीच यूरोपीय देशों का एक संयुक्त सैन्य दस्ता ग्रीनलैंड पहुंच चुका है, जहां सहयोगी देशों के साथ अभ्यास किया जा रहा है। यूरोपीय आयोग ने अपने नए बजट प्रस्ताव में ग्रीनलैंड पर होने वाले खर्च को दोगुना करने का सुझाव दिया है। आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड को यूरोप का राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा समर्थन आगे भी मिलता रहेगा।

ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का समर्थन नहीं करते, तो उनके खिलाफ भारी आयात शुल्क लगाए जा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी संसद का द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल कोपेनहेगन में तनाव घटाने की कोशिशों में जुटा है। ट्रंप पहले भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है। हालिया बयान में उन्होंने दवाओं पर टैरिफ की पुरानी चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में अमेरिका–यूरोप संबंधों की दिशा और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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