भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोक्सी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक अहम नया दावा किया है। ईडी ने पहली बार कहा है कि चोक्सी के बेटे रोहन चोक्सी भी कथित तौर पर धन शोधन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। यह बात दिल्ली स्थित अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई के दौरान रखी गई।
मामला मुंबई की एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसे ईडी ने वर्ष 2018 में कुर्क किया था। इस कुर्की के खिलाफ रोहन चोक्सी ने अपील दायर की थी। रोहन का कहना था कि संबंधित संपत्ति उनके पारिवारिक ट्रस्ट की है और इसे वर्ष 1994 में खरीदा गया था, इसलिए इसका कथित घोटाले से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, ईडी ने न्यायाधिकरण को बताया कि जांच में सामने आया है कि वर्ष 2013 में, जब धोखाधड़ी के उजागर होने की आशंका बढ़ने लगी थी, तब मेहुल चोक्सी ने इस संपत्ति को अपने बेटे के नाम स्थानांतरित कर दिया। एजेंसी के अनुसार, यह कदम संपत्ति को संभावित कानूनी कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया था।
ईडी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य इस ओर संकेत करते हैं कि रोहन चोक्सी मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी प्रक्रिया से अवगत थे और उसमें उनकी भूमिका रही। हालांकि, अब तक रोहन चोक्सी का नाम किसी भी एफआईआर या चार्जशीट में औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है। गौरतलब है कि मेहुल चोक्सी वर्ष 2017 में भारत छोड़कर फरार हो गया था। उस पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। वर्तमान में वह बेल्जियम की जेल में बंद है, जहां भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर रखी है।
ईडी द्वारा पीएनबी घोटाले की जांच के तहत अब तक चोक्सी, उसकी कंपनियों, संबंधित संस्थाओं और परिवार के सदस्यों से जुड़ी कई महंगी संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत करीब 2,565 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में मुंबई के प्रमुख इलाकों में स्थित कई आवासीय फ्लैट शामिल हैं। दादर ईस्ट में स्थित एक फ्लैट रोहन मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम दर्ज है, जिसे जांच से जुड़ी इकाई माना जा रहा है। वहीं, वालकेश्वर रोड पर स्थित एक अन्य संपत्ति सीधे रोहन चोक्सी के नाम पर पंजीकृत बताई गई है।


